बाढ़ में नेपाल से बहकर आया बिहार में दुर्लभ जीव पेंगोलिन ...जानिए

किशनगंज. दिघलबैंक प्रखंड के धनतोला पंचायत के नेपाल सीमा से सटे मोहमारी गांव में दक्षिण एशिया क्षेत्र में पाए जाने वाले दुर्लभ स्तनधारी एंटीएटर का एक प्रजाति पेंगोलिन को देखा गया है। बताया जा रहा है कि यह बाढ़ में नेपाल के रास्ते यहां पहुंचा है।मामले की जानकारी मिलते ही दिघलबैंक थाना ने ग्रामीणों से उसे अपने कस्टडी में लेते हुए वन विभाग के अररिया प्रमंडल के सुपुर्द कर दिया। अब इसे पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान लाया जाएगा। बहादुरगंज वन प्रसार पदाधिकारी राजेंद्र प्रसाद यादव बबलू यादव ने बताया कि बिहार में इस दुर्लभ प्राणी को आज से पहले केवल एक बार खगड़िया में देखा गया था। पकड़े गए जीव का वजन छह किलो है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 12 लाख आंका गया है। 

दो तरह के होते हैं पेंगोलिन प्रजातिपेंगोलिनया शल्कि चींटी खोर कौतुहल पैदा करने वाला प्राणी है। देश में दो तरह के पेंगोलिन पाए जाते हैं- भारतीय और चीनी। चीनी पेंगोलिन पूर्वोत्तर में पाया जाता है। दुनियाभर में पेंगोलिन की सात प्रजातियां पाई जाती हैं, लेकिन वनों में पाए जाने वाले चीनी पेंगोलिन की संख्या के बारे में कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। 
पेंगोलिन की दोनों प्रजातियों को आईयूसीएन द्वारा संकटापन्न प्रजातियां की सूची में रखा गया है। भारत में यह प्रजाति संरक्षित है। उसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची प्रथम में रखा गया है। नेपाल में भी इस प्रजाति का शिकार प्रतिबंधित है। यह बंगलादेश, चीन, भारत, म्यांमार, नेपाल, ताइवान, थाइलैंड और वियतनाम में राष्ट्रीय कानूनों से संरक्षित है। हालांकि विविध प्रकार की इसकी प्रजातियां सुरक्षित क्षेत्रों में हैं, लेकिन इस प्रजाति के संरक्षण के लिए केवल सुरक्षित क्षेत्र का दर्जा काफी नहीं है।

लेबल: , , , , , , , , , , ,