सम्मान: बिहार के एकमात्र जगदीशपुर-तियारी चेकडैम को इसरो ने जोड़ा भुवन से

बिहार के एकमात्र जगदीशपुर-तियारी चेकडैम को जियो टैगिंग से जोड़ा गया है। यह इकलौती पंचायत है जहां मनरेगा से होने वाले कार्यों की निगरानी इसरो के भुवन (गूगल अर्थ का भारतीय स्वरूप) से किया जाएगा। 
हैदराबाद में किया जाएगा पुरस्कृत 
पंचायत का चयन केन्द्र सरकार ने जीपीडीसी (जीआईएस पायलट डिस्ट्रिक्ट चैम्पियन) के रूप में किया है। जगदीशपुर-तियारी के मनरेगा पीओ अनिल कुमार व पीआरएस मिथिलेश कुमार को 29 जुलाई को हैदराबाद में पुरस्कृत किया जाएगा। 
क्या है इसरो और भुवन 
इंडियन स्पेश रिसर्च संगठन का संक्षप्ति रूप है इसरो। इसने 'गूगल अर्थ' की तर्ज पर 'भुवन' (ब्रेव हेल्पफुल अंडरस्टैंडिंग वर्चुअस अट्रैक्टिव नोबल) नाम से वेब पोर्टल बनाया है। इसके सहारे कहीं से भी किसी लोकेशन की तस्वीर ली जा सकती है और हालात जाने जा सकते हैं। 
क्या है जियो टैगिंग 
जियो टैगिंग का अर्थ ऑनलाइन मैपिंग के जरिये किसी स्थान को चह्निति कर उसे फोटो के जरिये टैग करना होता है। जब भी कोई ऑनलाइन मैप खोलेगा तो उस स्थान के बारे में सारी जानकारी मिल जायेगी। इसकी मदद से मनरेगा की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा सकेगी। ऐसे में योजना की गड़बड़ियों पर नजर रखने में आसानी होगी। 
क्यों नालंदा बना चैम्पियन 
नालंदा जिले को बाढ़-सुखाड़ से निजात दिलाने की दीर्घकालीन योजना पर मनरेगा की राशि से काम हुआ। तारीफ इतनी हुई कि बिहार सरकार ने 19 जुलाई को पटना में हुई उच्चस्तरीय बैठक में नालंदा मॉडल को पूरे सूबे में लागू करने की घोषणा कर दी। वहीं केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इसे अनुपम कहा।
बेशक, डीडीसी कुंदन कुमार के नेतृत्व में नालंदा के मनरेगाकर्मियों ने बेहतर काम किया है। पुरस्कार उसी का परिणाम है। चेकडैम, फल्डि पॉण्ड व अन्य निर्माण जिले में दीर्घकालीन प्रभाव डालेगा। निश्चित रूप से जिले के लोगों को काफी हद तक बाढ़ व सुखाड़ से निजात मिलेगी।
- डॉ. त्यागराजन एस मोहनराम, डीएम
नालंदा मॉडल मनरेगा वर्क्स की खूबियां 

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