ये हैं बिहार के रियल लाइफ 'करण-अर्जुन', एक को चोट लगे तो दूसरे को दर्द

दरभंगा.दो जिस्म मगर एक जान वाली कहावत पहले सुनने को मिलती थी। आज यह देखने को भी मिल रहा है। दो जुड़वां भाई और दोनों एक-दूसरे के पूरक। दोनों की उम्र सात वर्ष। उम्र में मात्र घंटे भर का फासला। दोनों एक-दूसरे की पीड़ा को झेलते हैं। एक का हाथ टूटता है तो दूसरे का भी हाथ बिना कुछ दुर्घटना के ही टूट जाता है। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं है।
दोनों रियल लाईफ के 'करण-अर्जुन' हैं।- यहां वास्तविक रूप में अगर देखना हो तो दरभंगा के बहेड़ा थाना अंतर्गत रामपुर गांव के संतोष झा व रुनम झा के जुड़वां पुत्र लव और कुश को देखिए।
- दोनों फिलहाल डीएमसीएच के प्रो. डॉ. एसएन सर्राफ के निजी क्लीनिक में इलाज करा रहे हैं।
- डॉ. सर्राफ व दोनों बच्चों की मां रुनम ने बताया कि लव का पांच बार हाथ टूटा तो कुश का भी टूटा, कुश का तीन बार हाथ टूटा तो लव का भी हाथ टूट गया।
- फिलहाल, दोनों बच्चों को हाथ टूटने के बाद यहां भर्ती कराया गया है।
- इसमें पहले कुश का हाथ टूटने के बाद उसके हाथ में नेल दिया गया जो अब ठीक है लेकिन ठीक घंटे भर के अंतराल के बाद लव का भी हाथ अपने-आप टूट गया जिसके हाथ में प्लेट लगाया गया है।
- दोनों बच्चे उक्त क्लीनिक में स्वस्थ हैं। इन्हें देखने के लिए लोगों की भीड़ लगी। दोनों बच्चों के पिता आर्थिक रूप से मजबूत नहीं हैं। वे बेंगलूर में रसोइया का कार्य करते हैं।
घरवालों को होती है काफी परेशानी
- 35 वर्षीया मां रुनम बताती हैं कि बचपन से ही दोनों के साथ यह वाकया हो रहा है।
- एक के बीमार पड़ते ही दूसरा भी उसी बीमारी की चपेट में आ जाता है।
- इससे घर वालों की परेशानी भी बढ़ जाती है। आर्थिक असर भी पड़ जाता है।
- दोनों बच्चे दिमागी तौर पर पूरी तरह स्वस्थ व सामान्य बच्चों की तरह हैं।
यह रिसर्च का है विषय : डॉ. सर्राफ
डॉ. एसएन सर्राफ ने बताया कि इस धारणा को चिकित्सा जगत नहीं मानता। इंटरनेट पर भी इसे सर्च कर जानने की कोशिश की लेकिन कहीं कोई जानकारी नहीं मिली। विदेशों के कई चिकित्सकों से भी संपर्क किया मगर सभी अचंभित ही हैं। यह रिसर्च का विषय है।

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