बिहार सहित पूर्वी भारत के विभिन्न हिस्सों में बुधवार शाम चार बज कर सात मिनट पर को भूकंप के झटके महसूस किए गए। अचानक धरती डोलने लगी जिससे लोग घरों में से निकलकर बाहर भाग आए। रिक्टर पैमाने पर 6.7 तीव्रता वाला यह कंपन भारत-म्यांमार सीमा पर केंद्रित था। बिहार के अलावा इसे पश्चिम बंगाल, ओडीसा, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश के साख बांग्लादेश और पूर्वोत्तर के राज्यों में महसूस किया गया।
बिहार में महज कुछ सेकंड के लिए भूकंप के बावजूद लोग घरों से निकलकर बाहर आ गए। पटना, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, गया, जहानाबाद, पूर्णिया, कटिहार, खगड़िया, चंपारण, सीतामढ़ी, सिवान, छपरा, नालंदा, नवादा सहित विभिन्न जिलों में झटके महसूस किए गए हैं। इससे लोगों में कौतूहल के साथ भय का आलम रहा। हांलांकि प्रारंभिक सूचनाओं में कहीं से जानमाल के किसी नुकसान की कोई सूचना नहीं है।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व बिहार में 14 अप्रैल 2016 को भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। तब भी भूकंप का केंद्र म्यानमार में ही था। इसमें जानमाल का कोई नुकसान नहीं हुआ था। बुधवार का भूकंप बिहार में इस साल धरती डोलनी की तीसरी घटना है। अप्रैल से पहले 22 फरवरी को भी बिहार में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए थे।
इससे पूर्व 15 दिसंबर 15 के अतिरिक्त 12 मई 2015 और अप्रैल में दो दिनों के अंतराल पर 27 अप्रैल व 29 अप्रैल को भू भूकंप के तगड़े झटके महसूस किए गए थे। अप्रैल 2015 के भूकंप के दौरान नेपाल में जान माल की भारी क्षति हुई थी। बिहार में भी कई जिलों में इससे व्यापक नुकसान हुआ था।
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