पटना। बिहार विधानमंडल की विशेष बैठक में आज जीएसटी बिल पर सर्वसम्मति से मुहर लग गई। विधानसभा में केवल माले ने अपना विरोध जताया इसके वाकआउट के बीच सदन ने इस बिल को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। उधर विधानपरिषद में भी इस विधेयक पर एकजुटता दिखी। परिषद ने भी सर्वसम्मति से इसे पारित कर दिया।
विधानसभा की विशेष बैठक ग्यारह बजे शुरू हुई। वित्तमंत्री बिजेंद्र यादव ने विधानसभा में राज्य सरकार की ओर से जीएसटी बिल का प्रस्ताव रखा। माले सदस्य महबूब आलम ने विरोध करते हुए वाकआउट किया और उनकी अनुपस्थिति में बिल को सर्वसम्मति से पारित घोषित किया गया।
विधान परिषद में मंत्री विजेंद्र यादव ने प्रस्ताव पेश किया जिसका भाजपा की ओर से पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने समर्थन किया। भाकपा के केदार पांडेय ने भी चर्चा में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने विधानसभा की तरह विधान परिषद में भी बिल का समर्थन करते हुए कहा कि इसके पारित होने से बिहार को लाभ होगा। इसके बाद इसे यहां भी सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।
वित्तमंत्री अरुण जेटली ने मुख्यमंत्री को दी बधाई
बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में 122वें संविधान संशोधन विधेयक (जीएसटी बिल) को पारित होने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को धन्यवाद देते हुए कहा कि बिहार को इस बिल के लागू होने का पूरा लाभ मिलेगा। उन्होंने अन्य राज्यों से भी बिहार से प्रेरणा लेकर जीएसटी बिल पारित करने का आग्रह किया।
विधानसभा में वित्तमंत्री विजेंद्र यादव ने रखा प्रस्ताव
इससे पूर्व बिहार के वित्तमंत्री बिजेंद्र यादव ने विधानसभा में राज्य सरकार की ओर से जीएसटी बिल का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि राष्ट्र हित में पहली बार राज्य और केंद्र की सरकार दोनों साथ मिलकर किसी प्रस्ताव पर सहमति देने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह एक एतिहासिक कदम है। वित्तमंत्री ने इस बिल पर सर्वसम्मति से अनुमोदन का आग्रह किया।
साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि केंद्र का अपने और राज्यहित को लेकर सोचने का अलग-अलग मापदंड है। इसी वजह से लंबे अरसे से यह बिल अटका रहा। उन्होंने कहा कि यह बिल सबके हित में है और एक-दो साल तक इससे राज्यों को आंशिक नुकसान होगा लेकिन भविष्य में इसके फायदे बहुत हैं।
वित्तमंत्री ने कहा कि जीएसटी का मौजूदा स्वरुप नए टैक्स प्रणाली का ढांचा' है और हर विरोध के बावजूद हम सर्वसम्मति से जीएसटी के साथ हैं।
कांग्रेस ने दिया समर्थन
कांग्रेस नेता सदानंद सिंह ने जीएसटी बिल के संशोधन के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि इसका प्रस्ताव यूपीए सरकार के समय में ही लाया गया था, लेकिन बीजेपी ही तब पीछे हट गई थी। उन्होंने ही तब इसका समर्थन नहीं किया था। सिंह ने कहा कि इस बिल से देश की प्रतिष्ठा बढ़ी है और इससे आर्थिक स्थिति सुधरेगी।
उन्होंने कहा कि गैर एनडीए शासित राज्यों में बिहार पहला राज्य है जो इस बिल के साथ है, जिस राज्य ने सबसे पहले इसका समर्थन किया वह एनडीए प्रशासित राज्य है। कांग्रेस के द्वारा लाए गए बिल को बीजेपी ने पास कर दिया, इसके लिए एनडीए को मैं धन्यवाद देता हूं।।
राजद ने भी दी सम्मति
राजद विधायक ललित यादव ने कहा कि 'जीएसटी पर सर्वसम्मति स्वागत योग्य' कदम है और देशहित के मुद्दों पर ऐसे ही सबको एकजुट रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिल पर राजद ने भी सम्मति जताई है और यह बिल राज्यहित में है।
माले ने किया विरोध
विधानसभा में माले विधायक महबूब आलम ने जीएसटी बिल का विरोध किया और माले समर्थक सदन से वॉकआउट कर गए। विधायक महबूब आलम ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि पब्लिक सेक्टर की हालत क्या हैं ये सभी जानते हैं और अब इस बिल के जरिए एनडीए की सरकार वर्ल्ड बैंक को हित पहुंचाना चाहती है। यह सरकार हमारे आर्थिक ढांचे को नुकसान पहुंचाना चाहती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को भी विशेष सत्र गरीबी, शिक्षा की बदहाली पर बुलाना चाहिए था ना कि जीएसटी बिल के लिए।
बीजेपी ने प्रधानमंत्री को दिया धन्यवाद
सदन में नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार ने कहा कि जब अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार थी उसी दौरान एक समान टैक्स पर बात चल रही थी लेकिन बात नहीं बनी थी। अब उनके बाद की पिछली सरकारों ने जो नहीं किया वह एनडीए सरकार ने कर दिखाया है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्य में लगातार टैक्स में गिरावट आई है । 2014/15 में जहां बिहार को 5733 करोड़ टैक्स के रूप में मिले, वहीं पिछले साल सिर्फ 3754 करोड़ ही मिल सके हैं।। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी की तारीफ़ होती है तो इसपर सत्ता पक्ष को आपत्ति होती है।
नीतीश ने कहा - जीएसटी सबके हित में
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दोनों सदनों में बिल पर चर्चा करते हुए कहा कि बिहार जीएसटी बिल पर अनुमोदन का संकल्प ले रहा है। इससे केंद्र सरकार और राज्यों की सरकारों को फायदा होगा। वर्तमान व्यवस्था में राज्य और केंद्र दोनों सरकारें टैक्स ले रही हैं। टैक्स रिफार्म के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
इसके लिए वर्ष 2010 में ही तत्कालीन प्रधानमंत्री ने संसद में यह प्रस्ताव लाया था और इसकी एकरूपता के लिए बिहार ने समर्थन किया है। हमने इसके कई पहलुओं पर विचार किया और उसके बाद इसका समर्थन किया है। केवल मैन्युफैक्चरिंग स्टेट ही इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन बिहार इसका समर्थन करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले भी केंद्रीय एमपावर कमिटी के चेयरमैन सुशील मोदी थे। बहुत सारे व्यापार अभी टैक्स नेट में नहीं आ रहे हैं। लेकिन इस बिल के लागू होने के बाद जो लोग दो नामवर बनकर कारोबार चला रहे हैं उनके कारोबार पर रोक लगेगी। कौन बेच रहा है? यह भले ही पता न हो लेकिन कहाँ बिक रहा यह अब पता चल जाएगा और इससे टैक्स भी मिल जाएगा। इस तरह से पारदर्शिता आ जाएगी।
नीतीश कुमार ने कहा कि नई व्यवस्था में हमे संचार सेवा पर भी टैक्स लेने का अधिकार मिल जाएगा। रेल में जो बिहार से यात्रा जरेंगे उसका हिस्सा भी मिल जाएगा। पहले निर्माता स्टेट को लाभ मिलता था अब कंज्यूमर स्टेट को भी लाभ होगा। व्यापर जगत से जुड़़े हुए लोगों की परेशानी अब कम हो जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बिल के पारित होने के बाद एक नेट में सारे राज्य जुड़ जाएंगे। इससे बाजार का विस्तार होगा। साथ ही इससे चेकपोस्ट की जरुरत ख़त्म हो जाएगी। इस बिल केल लागू होने के बाद कालाबाजारी खत्म होगी और कालेधन पर भी अंकुश लगेगा। अब टैक्स में 33 फीसद केंद्र का हिस्सा होगा और बाकी का हिस्सा राज्यों में बंट जाएगा।
नीतीश ने कहा कि 10 वर्षों से बिहार जीएसटी का समर्थन कर रहा है। अभी तो सिद्धान्त के तौर पर हो गया और नई कर प्रणाली की बुनियाद रखी गई है, लेकिन अभी बहुत काम बाकी है। अब इस बिल के पारित होने के बाद तीन तरह का कानून बनाना पड़ेगा। केंद्र स्टेट और अंतर स्टेट। छोटे ट्रेडरों पर भी राज्यों की चिंता थी। अब तय हो गया कि डेढ़ करोड़ टास्क के व्यापार पर राज्य का ही अधिकार होगा। हालांकि यह भी छोटा है। लेकिन अब अंत भला तो सब भला।
उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए कि केंद्र भी राज्यों में बैठकर टैक्स की वसूली करने लगे, कर वसूली राज्य का अपना अधिकार होना चाहिए। ऐसा नहीं होगा तो बिहार को लाभ नहीं मिलेगा और केंद्र को भी दिक्कत होगी। जैसे केंद्र कई मामलों में कर वसूल कर राज्यों को देगा उसी तरह बिहार भी कई मामलों में कर वसूल कर केंद्र को देगा। आईटी प्रणाली को इस तरह विकसित किया जाए कि ट्रेन, बैंक, बिजली कंपनी को भी इस दायरे में लाया जाए।
नीतीश कुमार ने कहा कि इस बिल का समर्थन इसलिए कर रहे हैं कि इससे कर प्रणाली सहज होगी, इसलिए नहीं कि और जटिल ही हो जाए। केंद्र को राज्यों में दफ्तर खोलकर टैक्स वसूलने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। बिहार कैंपिंग के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस उदारता से हमने इसका समर्थन किया है उसी उदारता से केंद्र भी बिहार का समर्थन करे।
सुशील मोदी ने जताई उम्मीद, बढ़ेगी राज्य की जीडीपी दर
परिषद में इस बिल पर चर्चा के दौरान भाजपा नेता सुशील मोदी ने कहा कि इस बिल के पारित हो जाने से राज्य की जीडीपी दर में एक से दो फीसद तक की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
कहा कि भाजपा शासित राज्यों ने इस बिल का कभी विरोध नहीं किया। सभी राज्य अपने-अपने कारणों से चिंतित थे। यूरोपीय संघ का हवाला देते हुए कहा कि अगर यूरोप के 27 देश मिलकर एक बाजार बन सकते हैं तो भारत तो एक देश है।
सीपीआई का भी समर्थन
सीपीआई के केदार नाथ पांडेय ने भी बिल का समर्थन किया। कहा कि राज्य के विकास में जीएसटी बिल की बड़ी भूमिका है और उनकी पार्टी राज्य हित में इसके पक्ष में है।
बिहार विधानमंडल के दोनों सदनोें की सहमति थी जरूरी
पिछले सप्ताह लोकसभा और राज्यसभा से पारित इस जीएटी बिल को राज्य में लागू करने के लिए राज्य विधानमंडल की सहमति जरूरी है। राज्य सरकार ने तभी साफ कर दिया था कि वह इस बिल को राज्य के दोनों सदनों से पारित कराएगी।
संसद के दोनोें सदनों से पारित होने के बाद अब 30 दिनोें के भीतर ही 29 में से 15 राज्यों से इसे पास कराने की जरूरत है। राज्यों में इसके पारित होने के बाद इसपर समीक्षा की जाएगी फिर इसे लागू किया जाएगा। राज्यों की विधानसभा से इस बिल के पारित होने के बाद राज्य सरकारों को अपने प्रदेश में नए टैक्स के निर्धारण के अधिकार मिल जाएंगे।
इस बिल में केंद्र सरकार ने 18 प्रतिशत तक के टैक्स का निर्धारण किया है, जिसपर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है, लेकिन अब राज्य सरकारों को इस बिल पर अपनी सहमति देकर इसे भेजना होगा, जिसके लिए बिहार के मुख्यमंत्री ने पहल करते हुए इसका स्वागत किया है। बता दें कि असम सरकार ने सबसे पहले इसे अपने विधानसभा से पारित कराकर केंद्र सरकार को भेज दिया है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस महत्वपूर्ण विधेयक के सर्वसम्मति से पारित होने के बाद वित्तमंत्री अरूण जेटली को फोन कर बधाई दी थी और पूछा था कि जीएसटी बिल को राज्यों की विधानसभा में पास होने के लिए कब भेजेंगे? साथ ही नीतीश ने वादा किया था कि वह सबसे पहले अपने विधानसभा से पास करा कर इस बिल को भेज देंगे।
सूत्रों के अनुसार नीतीश ने इसके बारे में वित्तमंत्री अरूण जेटली से विस्तार से बातचीत की थी और हर तरह से सहयोग करने का भरोसा भी दिलाया था। नीतीश कुमार ने यह भी कहा कि जीएसटी से हर साल बिहार सरकार रेवेन्यू के आधार पर 8000 करोड़ का राजस्व वसूलती है। ज्ञात हो कि नीतीश कुमार शुरू से ही जीएसटी के पक्षधर रहे हैं।
नीतीश कुमार और केंद्र की एनडीए सरकार के बीच जीएसटी के मुद्दे पर बढी नजदीकी को लेकर जेडीयू ने कहा है कि यह एक खास उद्देश्य के लिए सपोर्ट है क्योंकि इससे बिहार को भी फायदा होने वाला है।