शहाबुद्दीन शनिवार को जेल से रिहा हो गए। दो सगे भाई समेत तकरीबन 2 दर्जन से ज्यादा की हत्या के आरोप में 11 वर्षो से शहाबुद्दीन जेल में बंद थे। पटना हाई कोर्ट से बुधवार को जमानत मिलने के बाद वो आज रिहा हो गए। बाहुबली शहाबुद्दीन को रिसीव करने के लिए बड़ी संख्या में लोग जेल के बाहर खड़ा थे। ये लोग अपने नेता के पक्ष में नारा लगाते हुए कहा कि 'जेल के ताले टूट गए, सरकार के "साहेब" छूट गए'। शहाबुद्दीन सैकड़ों गाड़ियों के काफिले में सिवान स्थित पैतृक गांव प्रतापपुर पहुंच चुके हैं।
शहाबुद्दीन ने जेल से बाहर आते ही दिखाई 'ताकत', एक झटके में सैंकड़ो गाड़ियों को कराया टोल फ्री
भागलपुर जेल से निकलते ही बाहुबली शहाबुद्दीन को वीआईपी ट्रीटमेंट मिलने की खबरे भी आने लगी हैं। मामला मुजफ्फरपुर से जुड़ा है जहां एनएच स्थित टोल टैक्स प्लाजा पर शहाबुद्दीन और उनके काफिले में शामिल गाड़ियां बगैर टैक्स दिये ही धड़ल्ले से निकलीं। गाड़ियों की संख्या कितनी थी इसका अंदाजा टोल प्लाजा के कर्मचारी भी नहीं लगा सके। जेल से निकले शाहबुद्दीन के काफिला में शामिल चार पहिया वाहनें एनएच पर पूरी तरह से बिना रोक टोक के चली। एनएच पर गाड़ियों से टैक्स वसूलने के लिए बनाये गये टोल प्लाजा के कर्मियों और प्रबंधकों की भी हिम्मत काफिले में शामिल गाड़ियों से टैक्स वसूलने की नहीं हुई। मुजफ्फरपुर में तो बकायदा मनियारी थाना पुलिस ने एन एच 28 पर काजीइंडा के पास लगाये गये टोल प्लाजा के प्रबंधक को कहकर टॉल फ्री करवा दिया। टोल प्लाजा के प्रबंधक के पास काफिला पास करने के करीब तीन घंटे पहले ही पुलिस का फरमान आ गया था। प्लाजा के प्रबंधक के मुताबिक किसी वीआईपी की सूचना पर जाम की स्थिति से बचने के लिए कभी-कभी बिना टैक्स लिये ही गाड़ियों को जाने दिया जाता है। लेकिन इस बार पुलिस ने जेल से निकले शाहबुद्दीन का नाम लिया जिनके काफिले में सैकड़ों गाड़ियां थीं। भागलपुर जेल से सीवान के लिए निकले शाहबुद्दीन के काफिले में कई लाल बत्ती लगी गाड़ियां भी शामिल थीं। काफिले में राजद और सपा के झंडे लगी कई गाड़ियां थीं साथ ही पंचायत प्रतनिधियों के बोर्ड लगे सैकड़ों गाड़ियों का काफिला शहाबुद्दीन के साथ था।
नीतीश को बताया परिस्थितियों का मुख्यमंत्री
13 साल जेल में बिताने के बाद जमानत पर जेल से रिहा होने के बाद शहाबुद्दीन काफी खुश नजर आए और जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार हमारे परिस्थितियों के नेता हैं। लेकिन लालू यादव ही हमारे नेता हैं।
जेल से बाहर आने के बाद शहाबुद्दीन ने मीडिया के प्रश्नों का जवाब देते हुए कहा कि कोई मुझसे क्यों डरेगा? मैं कोई डरावनी चीज तो हूं नहीं? ये सब कहना गलत है कि लोग मुझसे डरे हुए हैं। मुझे आतंक का पर्याय कहना गलत है। मैं 13 साल बाद अपने घर जा रहा हूं। पिछले 10 साल से मैंने किसी से मुलाकात नहीं की है और न कोई पब्लिक मीटिंग की है।
राजदेव रंजन हत्याकांड पर बोले शहाबुद्दीन-सीबीआई से पूछिए
पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड मामले में पूछे जाने पर शहाबुद्दीन ने कहा कि यह मामला किसी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से आया था, वहीं लोग बताएंगे या सीबीआई बताएगी। उन्होंने कहा कि कौन कहता है कि सिवान में लोग डरे हुए हैं? सिवान की बाइस लाख जनता में अगर दस लोग बेवजह डरे हुए हैं तो मैं क्या कर सकता हूं? कोई मेरी वजह से डरा हुआ है ये बात मुझे नहीं पता, सिवान के लोग खुश हैं।
उन्होंने कहा कि जो लोग यह कह रहे वो लोग मेरा इमेज खराब कर रहे हैं। शहाबुद्दीन ने कहा कि वह घर जाने के बाद राजदेव के परिवार से भी मिलेंगे।
सुशील मोदी के बयान को गंभीरता से नहीं लेता
भाजपा नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि मैं उन्हें गंभीरता से नहीं लेता। शहाबुद्दीन ने न्यायलय पर विश्वास जताया और कहा कि मुझे न्याय मिलेगा इसपर पूरा भरोसा था। लंबे अंतराल के बाद जेल के बाहर की हवा और परिवार के पास जाने की खुशी है। लालू यादव का शहाबुद्दीन प्रेम
राजद प्रमुख लालू प्रसाद के खास माने जाने वाले पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को 8 मामलों में दो साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो चुकी है। लेकिन इतना होने के बाद भी शहाबुद्दीन लालू यादव के दुलारे माने जाते रहे हैं। लालू ने अपने बुरे दिनों में भी शहाबुद्दीन का पूरा ख्याल रखा। 2010 के चुनाव से पहले लालू खुद जाकर शहाबुद्दीन से जेल में मिले भी थे। शहाबुद्दीन को सजा होने पर लालू ने शहाबुद्दीन की पत्नी हीना को दिटक दिया था। लेकिन वो दोनों बार चुनाव हार गई।
अपराधी की दुनिया का है बेताज बादशाह
19 साल की उम्र में शहाबुद्दीन ने अपराध की दुनिया में कदम रखा था। वो पहली बार 1990 में जेल में रहते हुए ही निर्दलीय विधायकी का चुनाव जीतने वाले शहाबुद्दीन पर 63 केस दर्ज हैं। सीवान में शहाबुद्दीन को साहेब के नाम से जाना जाता है। शहाबुद्दनी की गिरफ्तारी के बाद ही नीतीश कुमार को सुशासन बाबू कहा जाने लगा था। नीतीश कुमार ने भी शहाबुद्दीन की गिरफ्तारी के बाद प्रदेश में कानून का राज स्थापित करने का भरोसा जनता को दिया था।
इस कारण शहाबुद्दीन को कहा जाता है कुख्यात
शहाबुद्दीन का अपराध से रिश्ता 80 के दशक से जुड़ गया था। 1986 में पहली बार उसके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद तो यह सिलसिला दिन प्रति दिन बढ़ता ही चला गया। शहाबुद्दीन के नाम दर्ज होते मामले को देखते हुए पुलिस ने सीवान के हुसैनगंज थाने में शहाबुद्दीन की हिस्ट्रीशीट खोल दी थी। फिर यह ए श्रेणी का हिस्ट्रीशीटर घोषित कर दिया गया था।
जिसने किया विरोध उसका हो गया काम तमाम
साल 2001 में सासंद रहते हुए शहाबुद्दीन ने एक पुलिस अधिकारी को थप्पड़ मार दिया था। इसके बाद ही शहाबुद्दीन का पूरे प्रदेश में खौफ बन गया था। पुलिस ने पहली बार शहाबुद्दीन गिरोह के पास से ही एके-47 बरामद किया था। आरोप लगता है कि सीवान में शहाबुद्दीन की सत्ता को जिसने भी चुनौती दी उसका काम इसने तमाम करवा दिया। पुलिस ने जब शहाबुद्दीन को गिरफ्तार करने उसके घर पहुंची थी तो उसके गुर्गे ने कई घंटों तक गोली चलाये थे। लेकिन इसके बाद भी पुलिस ने जब उसे गिरफ्तार करने के लिए उसके घर में प्रवेश की थी तो पुलिस को उसके घर से एके-47, रात में दिखने वाले चश्मा और पाकिस्तान से निर्मित पिस्टल भी बरामद किया गया था।
एक बेटा और दो बेटी के पिता हैं मोहम्मद शहाबुद्दीन
बिहार में आतंक का दूसरा नाम कहे जाने वाले शहाबुद्दीन का जन्म 10 मई 1967 को सीवान जिले के प्रतापपुर में हुआ था। शहाबुद्दीन की शिक्षा दीक्षा बिहार में ही पूरा किया। राजनीति में एमए और पीएचडी करने के समय ही इनका रिश्ता अपराध की दुनिया से जुड़ गया था। शहाबुद्दीन ने हिना शहाब से शादी की थी। एक बेटा और दो बेटी के बाप शहाबुद्दीन ने कुछ ही वर्षों में अपराध और राजनीति में काफी नाम कमाया।