- क्या होगा महागठबंधन का, अगर बन गयी ऐसी स्थिति, नितीश मिला सकते है बीजेपी से हाथ।
महेंद्र प्रसाद, सहरसा
बिहार की राजनीति में हो सकते हैं बड़े बदलाव.......
बिहार में महागठबंधन की सरकार है। राजद, जदयू तथा कांग्रेस की मौजूदा सरकार का सबसे चौकानें वाला निर्णय जनता को पसंद आ रहा है, लेकिन करोड़पति से अरबपति बनने की ख्वाहिस रखने वाले विधायकों को यह नापसंद कर रहा है। वे वर्तमान सीएम नीतीश कुमार से इसलिए नाराज चल रहे है क्योंकि वे शराब के धंधे से ही राजनीति में आए है। शराब बंदी से उनका सारा कारोबार चौपट हो गया है। इसलिए उन्हें राजनीति का कोई स्वाद ही नहीं आ रहा है। वे अन्दर ही अन्दर गुल खिला रहे है। भले ही यह सुनने में अटपटा लग रहा हो, लेकिन राजनीति के अन्दर खाने की यह रिपोर्ट है कि राजद से जदयू किनारा करना चाहता है, सिर्फ इसलिए क्योंकि नीतीश कुमार को पूरी तरह से पता चल गया है राजद के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव सत्ता अपने हाथ में लेना चाहते है। वे अपने पुत्र तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री देखना चाहते है। जबकि सरकार की बागडोर एम वाई समीकरण पर आधारित करने की पहल भी तेज हो गयी है। शहाबुद्यीन की रिहाई के बाद जदयू को दो भागों में तोड़कर एक भाग का समर्थन हासिल करने की जुगाड़ की जाने की संभावना व आशंका है। हिना शहाब को उपमुख्यमंत्री की बागडोर मिल सकती है। हांलाकि अभी कोई भी इसकी पुष्टि नहीं कर रहा है, लेकिन अन्दर इसकी खिचड़ी पक रही है। लालू प्रसाद यादव इसकी भनक नहीं लगने देना चाहते है। राजद को छोड़कर जदयू का दामन थामने वाले तकरीबन 25 विधायक ऐसे है, जो आज भी लालू प्रसाद यादव के एहसान को मानते है। ऐसे में यदि जदयू के आधे विधायक राजद के साथ हो जाते है तो एक बार फिर वही कहावत दोहराई जायेगी जो समता पार्टी से टूटकर जदयू बनने या फिर जदयू एवं जदएस बनने के समय हुआ था। इधर नीतीश कुमार भी अपनी सुरक्षा के लिए भाजपा से नजदीकियां बढ़ा रहे है। ऐसे में यदि सरकार बनता है तो दो प्रकार की राजनीतिक स्थितियां बनेगी। एक जदयू अपनी सुरक्षा को लेकर व पार्टी को टूटने से बचाने के लिए बीजेपी का दामन थाम सकती है। ऐसे में जदयू के 71 व बीजेपी के 53 विधायक मिलकर कुल 124 का आंकड़ा पूरा हो सकता है। केन्द्र में बीजेपी को समर्थन दे रहीं हम के एक, रालोसपा के दो तथा लोजपा के दो विधायक का जदयू को समर्थन मिल सकता है। ऐसे में जदयू 129 तथा निर्दलीय 4 विधायक के सहारे 133 का आंकड़ा पूरा कर एक बार फिर बीजेपी के सहारे अपनी नैया को अगले पांच वर्षो के लिए चला सकते है।
नोटबंदी पर खुलकर समर्थन में आए नीतीश कुमार
8 नवंबर को इधर देर रात पीएम मोदी ने 500 और 1000 के नोटों की बंदी की घोषणा की और उधर अगले ही दिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार के इस पहल की तारीफ कर दी। उन्होंने इस कदम के लिए पीएम मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली को बधाई भी दी.नीतीश कुमार यहीं तक सीमित रहते तो इसका सियासी मतलब नहीं भी निकाला जा सकता था लेकिन जबसे उन्होंने दोबारा तारीफ करते हुए मधुबनी के वाटसन स्कूल में 'निश्चय यात्रा' के दौरान कहा कि हम 500-100 के नोट बंद करने के फैसले के हिमायती हैं, तब से कयासों का दौर शुरू गया है हो।
नीतीश कुमार के इस कदम ने बिहार की सियासत में कई संभावनों को जन्म देने का काम किया है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है कि दोस्त से दुश्मन बने नीतीश फिर से बीजेपी के साथ कंधा से कंधा मिलाकर चलने को तैयार हैं।
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद विपक्ष सबूत मांगने में लगा था और नीतीश ने की थी सरकार की प्रशंसा
नीतीश कुमार ने भारतीय सेना की ओर से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में किए सर्जिकल स्ट्राइक के समर्थन में ट्वीट करने से तो यही लगता है कि नीतीश और पीएम मोदी के बीच की दूरियां कुछ कम होती जा रही हैं। नीतीश ने इसके समर्थन में जो ट्वीट किया था उसमें पहले केंद्र सरकार की प्रशंसा की गई थी और फिर सेना को धन्यवाद दिया गया था।
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद कांग्रेस और केजरीवाल ने तो सरकार से इसके सबूत तक मांगे थे। उस समय भी नीतीश कुमार ने सबसे पहले ट्वीट कर सरकार के निर्णय और सेना के जवानों की तारीफ की थी। वहीं राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने इस मामले में मोदी सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाया था।
दीनदयाल उपाध्याय जन्मशती समारोह के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में बनी कमीटियों में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जेडीयू नेता शरद यादव को शामिल किए जाने के बाद से ही बीजेपी और जदयू के साथ आने की चर्चा जोर पकड़ ली थी। नीतीश कुमार के मोदी सरकार की नीतियों और फैसलों के लगातार समर्थन के बाद इसे और बल मिल गया है।
दूसरी ओर राजद तेजस्वी को सीएम बनाने के लिए स्वयं के 80, कांग्रेस के 27, सीपीआई के 3, निर्दलीय 4 के भरोसे 114 का आंकड़ा पूरा कर सकते है। जदयू को तोड़ पाने में सफल नहीं होने पर राजद को विपक्ष में बैठना पड़ सकता है। तीसरी स्थिति यह बन रहीं है कि शराब बंदी के बाद नीतीश का लोकप्रियता काफी बढ़ गयी है। इसलिए यदि राजद नीतीश से समर्थन् वापस लेती है तो नीतीश कुमार चुनाव करवाना ही चाहेंगे और स्वयं के बदौलत पश्चिम बंगाल की तरह कुर्सी पर आसीन होना चाहेंगे। इसकी पटकथा लिखी जा रही है।
नीतीश सरकार चलाना चाहते है, लेकिन दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं करना चाहते है। अपना कद बढ़ाने के लिए बिहार में शराब बंदी के बाद अन्य प्रदेश में यही नारा देकर अपने कद को और भी बढ़ाते हुये मोदी के समान करने की जुगत में है, लेकिन राजद के कुछ विधायक की करतूत को लेकर बिहार की वर्तमान सरकार की छवि काफी धुमिल हो रहीं है। ऐसे में नीतीश चाहते है कि वे राजद के बदले भाजपा का साथ मिल जाए। इधर बिहार के भाजपाई भी सत्ता के बाहर रहने के बदले सरकार में आने की अकुलाहट में है।
सम्मान के साथ होगी एनडीए में नीतीश कुमार की वापसी!
अपनी साफ सुधरी छवि के लिए मशहूर नीतीश के इस दांव के बाद 10 साल के बाद बिहार की सत्ता में हाल ही में लौटे लालू के लिए आगे की राह फिर से मुश्किल दिखने लगी है। इस बात की चर्चा जोर पकड़ लिया है कि नीतीश कुमार का लगातार केंद्र सरकार के प्रयासों का समर्थन, गठबंधन में दरार आने का संकेत है।
बिहार बीजेपी के अधिकांश कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच सुशील मोदी की स्वीकार्यता बनने की संभावना कम ही नजर आती है। इस वजह से बीजेपी के लिए भी नीतीश कुमार एकमात्र विकल्प हैं। बीजेपी के लिए नीतीश कुमार के नेतृत्व को स्वीकारने में ही भलाई दिख रही है।
इस प्रकार की अटकले अभी महज अटकले ही लग रहीं है, लेकिन इन बिन्दुओं पर अब चर्चा होने लगी है। यदि ये परिस्थितियां नहीं बनती है तो सरकार का गिर रहा कद , पांच वर्ष पहले का बिहार एक बार फिर गर्त में जाने की ओर मुखर दिख रहा है। छटपटाहट सभी को है, कौई सरकार बनाना चाहता है, कोई कद, कोई शामिल होना चाहता है तो कोई नये चुनाव के सहारे अपने बल में वापसी। अटकलें, आशंकाएं, खीचांतानी सभी चल रहीं है……देखिए आगे आगे होता है क्या ?
बिहार में दलीय विधायक की संख्या
राजद - 80
जदयू - 71
बीजेपी - 53
कांग्रेस - 27
निर्दलीय - 4
सीपीआई - 3
लोजपा - 2
रालोसपा - 2
हम - 1
कुल - 243
ये सिर्फ अनुमान पर आधारित है।
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