बीमारियों की रोकथाम के लिए मुजफ्फरपुर में होमियोपैथी दवा पर रिसर्च होगा। इसके लिए आरबीटीएस होमियोपैथी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में नवम्बर तक बिहार का पहला रिसर्च सेंटर खुलेगा। केन्द्रीय होमियोपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच) ने इसको हरी झंडी दे दी है।
आरंभ में यहां श्वांसजनित बीमारियों की दवा पर स्थानीय के साथ देश के अन्य अस्पतालों के होमियोपैथ डॉक्टर रिसर्च के लिए आएंगे। हर साल गर्मी के मौसम में बच्चों पर कहर बरपाने वाली एईएस (एक्यूट इंसेफलाइटिस सिण्ड्रॉम) की रोकथाम के लिए दवा पर रिसर्च होगा।
पिछले दो साल से केन्द्र सरकार आयुष मंत्रालय को इस बीमारी की रोकथाम के लिए होमियोपैथी इलाज व दवा के उपयोग की सलाह दे रही थी, लेकिन कोई बेहतर रिसर्च सेंटर नहीं होने की वजह से इस पर काम नहीं हो पा रहा था। इस रिसर्च सेंटर में देश के जाने माने होमियोपैथ के वैज्ञानिक व डॉक्टर आएंगे। एईएस पीड़ित बच्चों के लक्षणों पर आधारित दवा तैयार होगी। अगर नई दवा से सफलता मिलेगी तो इसको अस्पताल के ओपीडी में शुरू कर दिया जाएगा। दवाओं पर रिसर्च के लिए आवश्यकता होने पर एलोपैथ के वैज्ञानिकों व डॉक्टरों से भी सहयोग लिया जाएगा।
कालाजार की दवा के लिए हो चुका है रिसर्च
25 साल पूर्व मुजफ्फरपुर समेत उत्तर बिहार के कई जिलों में कालाजार बीमारी फैली थी तो कॉलेज में रिसर्च सेंटर खुला था। सरकार से बेहतर सहयोग नहीं मिलने व अन्य कारणों से सेंटर बंद हो गया। अब सरकार इस पर पहल की तो है आयुष मंत्रालय ने फिर से नया रिसर्च सेंटर खोलने की अनुमति दी है।
सीसीआरएच ने रिसर्च सेंटर खोलने की अनुमति दी है। 15 दिन पूर्व वह स्वयं दिल्ली गए थे। वहां कॉलेज के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया है। उम्मीद है कि नवम्बर तक रिसर्च सेंटर खुल जाएगा।
- डॉ. वीएनएस भारती, प्राचार्य आरबीटीएस होमियोपैथी कॉलेज
लेबल: हिंदी समाचार, Bihar, Central Government, Government, Health, Medical, Medicine, Muzaffarpur, State