सुप्रीम कोर्ट ने आज राजद नेता और पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की जमानत रद्द कर दी है. इसके बाद सिवान के एसपी और डीएम सहित बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स शहाबुद्दीन को गिरफ्तार करने उनके घर प्रतापपुर पहुंचे, लेकिन शहाबु्द्दीन वहां नहीं मिले. थोड़ी देर में पता चला कि वहां उनके पहुंचने से पहले ही शहाबुद्दीन ने आत्मसमर्पण कर दिया. इसके साथ ही उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है.
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान फिर सवाल किया कि राजीव रोशन हत्याकांड के 17 महीने बाद भी शहाबुद्दीन को आरोप-पत्र की प्रति क्यों नहीं मुहैया करायी गयी. राजीव अपने दो छोटे भाइयों की हत्या का चश्मदीद गवाह था, जिसकी हत्या अदालत में उसकी गवाही से कुछ ही दिनों पहले कर दी गयी थी.
आपको बता दें कि बाहुबली नेता शहाबुद्दीन की जेल से रिहाई के खिलाफ दायर अर्जियों पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर ली थी. एक हत्याकांड में पटना हाइकोर्ट से शहाबुद्दीन को दी गयी जमानत को चुनौती देने वाली दो अपीलों पर कोर्ट ने गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
जमानत रद्द न करने की अपील की थी
इससे पहले, शहाबुद्दीन के वकील शेखर नाफड़े ने कई तकनीकी पहलुओं के सहारे
जमानत रद्द ना करने के लिए जोरदार पैरवी की थी. उन्होंने दलील दी कि चंदा
बाबू के जिस तीसरे लड़के की हत्या का आरोप उनके मुवक्किल पर है, उस हत्या के
समय तो वो जेल में था. दूसरी तरफ चंदा बाबू के वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट
से कहा था कि शहाबुद्दीन जेल में था, लेकिन अपनी मर्जी से जब चाहता था,
बाहर आ जाता था और ये बात तो सीवान के मजिस्ट्रेट ने भी अपनी रिपोर्ट में
बताई थी.
शहाबुद्दीन के वकील ने दलील दी थी कि उनके मुवक्किल को चार्जशीट की कॉपी
तक नहीं दी गई। कोर्ट ने चार्जशीट वाले आरोप पर जब बिहार सरकार के वकील से
पूछा तो बिहार सरकार के पास कोई जवाब नहीं था. जिस पर कोर्ट ने टिप्पणी की
थी कि ये तो गंभीर बात है कि 17 महीने तक अभियुक्त को चार्जशीट की कॉपी
नहीं दी गई. प्रशांत भूषण ने इस आरोप का जवाब देते हुए कहा था कि
शहाबुद्दीन ने कभी भी चार्जशीट की मांग नहीं की. ऐसे में ये आरोप बेबुनियाद
है.
आखिर में शहाबुद्दीन ने कोर्ट से ये गुहार लगाई थी कि आप जो चाहें शर्ते
लगा दें. आप कहें तो मैं बिहार छोड़ने को तैयार हूं, लेकिन जमानत रद्द न की
जाए.
सुप्रीम फैसले के बाद रोए चंदा बाबू-कलावती
सुप्रीम कोर्ट की ओर से बाहुबली नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन की जमानत रद्द
करने के फैसले का चंदा बाबू और कलावती देवी ने स्वागत किया है. कोर्ट के इस
फैसले के बाद चंदा बाबू और कलावती देवी की आंखे बर आईं. चंदा बाबू ने
कोर्ट के फैसले के बाद कहा कि आखिर कार उन्हे सुप्रीम कोर्ट से इंसाफ मिला. हाईकोर्ट को इस मामले में पहले ही जमानत रद्द कर देनी चाहिए थी. उन्होंने
कहा कि मैं इस जीत का श्रेय मीडिया को देता हूं. वहीं कलावती देवी ने
सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद देते हुए कहा कि कोर्ट के इस फैसले से लोगों का
मनोबल ऊंचा होगा.
बता दें कि शहाबुद्दीन नवंबर 2005 से जेल में बंद थे. उन्हें दोहरे
हत्याकांड में हाईकोर्ट से फरवरी में ही जमानत मिल गई थी लेकिन सीवान की
कोर्ट ने राजीव रोशन की हत्या के मामले में शहाबुद्दीन को दोषी मानते हुए
उम्रकैद की सजा सुनाई थी.
इसके बाद शहाबुद्दीन ने इसे चैलेंज करते हुए पटना हाईकोर्ट में अपील
दायर की. इसके बाद हाईकोर्ट ने शहाबुद्दीन को जमानत दे दी थी और वो 13 साल
बाद जेल से बाहर निकले थे. शहाबुद्दीन के बाहर आने के बाद उनके बेल को
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी.
क्या है केस
16 अगस्त, 2004 को सीवान में दो सगे भाइयों गिरीश और सतीश राज को अगवा करने के बाद उनकी तेजाब से जला कर हत्या कर दी गयी थी. अब तक उनके शव नहीं मिले हैं. इस मामले में आरोप शहाबुद्दीन पर लगा था. इस केस के एकमात्र चश्मदीद गवाह तीसरा भाई राजीव रोशन था. टाउन थाना कांड के केस संख्या 220-2014 के मुताबिक 17 जून, 2014 को तीसरे भाई राजीव रोशन की भी गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी. इसके बाद सीवान टाउन थाने में उसके पिता ने प्राथमिकी दर्ज करायी थी. प्राथमिकी में शहाबुद्दीन को हत्या की साजिश रचने का आरोपित बनाया गया. कहा गया कि चूंकि राजीव रोशन अपने दोनों भाइयों की हत्या का एकमात्र चश्मदीद गवाह था और वह गवाही देनेवाला था, इस कारण सीवान शहर में डीएवी कॉलेज के नजदीक मोटरसाइकिल पर सवार तीन लोगों ने उसकी गोली मार कर हत्या कर दी.
10 सितंबर को आये थे जेल के बाहर
भागलपुर विशेष केंद्रीय कारे से 10 सितंबर की सुबह सात बज कर पांच मिनट पर राजद के पूर्व सांसद मो शहाबुद्दीन बाहर निकले थे. वे सफेद कुरता-पायजामा में थे. उनके बाहर निकलते ही समर्थकों का हुजूम उमड़ पड़ा था. जेल से बाहर निकलते ही उन्होंने मीडिया से बात की थी और कहा था कि लालू हमारे नेता हैं, नीतीश परिस्थितियों के मुख्यमंत्री हैं. उनसे जब पूछा गया कि महागंठबंधन की सरकार है, ऐसे में वे लालू और नीतीश में किसे अच्छा राजनीतिज्ञ मानते हैं, तो उन्होंने बेबाक अंदाज में कहा कि वे किसके साथ थे, हैं और रहेंगे इसमें किसी तरह का किसी को कंफ्यूजन नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि वे किसके निर्देश पर राजनीति में आये हैं, यह सभी को पता है.लेबल: महागठबंधन, हिंदी समाचार, Bihar, Court, Government, India, MLA, MP, Politics, RJD, State Government, Supreme Court