बिहार बोर्ड ने इंटर की पढ़ाई में बड़ा बदलाव किया है। अब इंटर में स्ट्रीमवाइज पढ़ाई नहीं होगी। यानी साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स स्ट्रीम को खत्म कर दिया गया है। छात्र मनचाहा विषय लेकर इंटर कर सकेंगे। अब सिर्फ इंटरमीडिएट होगा। छात्रों को इंटमीडिएट की डिग्री दी जाएगी। शनिवार को बोर्ड की गवर्निंग बॉडी की बैठक में यह फैसला लिया गया। प्रस्ताव को अब बोर्ड सरकार के पास भेजेगा। सरकार का आदेश मिलते ही इसे 2018 से लागू किया जाएगा।
छात्र दो भाषा और तीन वैकल्पिक और एक एच्छिक विषय चुन सकेंगे
बिहार बोर्ड के नए सिलेबस के अनुसार, छात्र कोई भी विषय लेकर इंटर कर सकेंगे। इसमें विषयों के चयन में कोई बाध्यता नहीं रहेगी। छात्र मनचाहा विषय लेकर पढ़ाई कर सकेंगे। 11 वीं और 12 वीं कक्षा में छात्रों को अनिवार्य रूप से दो भाषाएं लेनी होंगी। उन्हें 12 भाषा समूहों में से इसका चयन करना होगा।
वहीं 19 वैकल्पिक विषयों में से तीन विषयों को अनिवार्य रूप से लेना होगा। इसमें भी विषयों के चयन की कोई बाध्यता नहीं है। हालांकि छात्र भाषा समूह या वैकल्पिक विषय में से किसी एक विषय को रख सकता है जिसे एच्छिक माना जाएगा।
ये हैं वैकल्पिक विषय
गणित, जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान, रसायनशास्त्र, कंप्यूटर साइंस, इतिहास, राजनीतिशास्त्र, भूगोल, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र, गृह विज्ञान, संगीत, बिजनेस स्टडीज, एकाउंटेंसी, इंटरप्रेन्योरशिप, मल्टी मीडिया एंड वेब टेक्नोलॉजी, योग और शारीरिक शिक्षा
ये हैं भाषा समूह
हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी, संस्कृत, बांग्ला, मैथिली, मगही, अरबी, फारसी, भोजपुरी, पाली, प्राकृत कॉलेजों की सीटें भी होंगी मर्ज इस फैसले के बाद कॉलेजों की अलग-अलग स्ट्रीम के लिए दी गई सीटें भी मर्ज हो जाएंगी। यानि अगर किसी कॉलेज में आर्ट्स की 100, साइंस की 100 और कॉर्मस की 50 सीटें हैं तो अब उस कॉलेज में कुल सीटों की संख्या 250 कर दी जाएगी, इतने छात्रों का नामांकन लिया जाएगा। स्ट्रीम की व्यवस्था नहीं रहेगी। यह छात्रों पर निर्भर है कि उसे क्या करना है।
पाठ्यक्रम में पहले से ही है यह व्यवस्था
बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि एससीईआरटी द्वारा इंटर परीक्षा के लिए तैयार किए गए पाठ्यक्रम में पहले से ही यह व्यवस्था है। इस व्यवस्था को शिक्षा विभाग से अनुमोदन भी प्राप्त है, इसी फैसले को हमलोग लागू कर रहे हैं। सत्र 2007-09 के लिए तैयार किए गए पाठ्यक्रम में यह व्यवस्था लागू की गई थी। तत्कालीन अध्यक्ष ने ही यह फैसला लिया था। अब हमलोग उसे इंप्लीमेंट कर रहे हैं। गर्वनिंग बॉडी की सहमति इस पर है।
परीक्षकों की उम्रसीमा बढ़ी
बिहार बोर्ड ने परीक्षकों की उम्रसीमा में भी बढ़ोतरी कर दी है। माध्यमिक और इंटरमीडिएट परीक्षा में मूल्यांकन करनेवाले शिक्षक जिनकी सेवानिवृत्त होने की उम्र 60 वर्ष है उनकी सेवाएं 67 वर्ष की उम्र तक ली जाएगी। वहीं अंगीभूत कॉलेजों के सेवानिवृत्त होनेवाले शिक्षकों की परीक्षक में रूप में 70 सेवा वर्ष की उम्र तक ली जाएगी के। अभी उनकी सेवानिवृत्त होने की उम्र 65 वर्ष है।
कॉपियों के मूल्यांकन का मानेदय बढ़ा
बोर्ड ने कॉपियों के मूल्यांकन का मानदेय भी बढ़ा दिया है। कॉपियों के मूल्यांकन में चार रुपये की वृद्धि की गई है। अब तक मैट्रिक के मूल्यांकन में प्रति कॉपी शिक्षकों को 12 रुपये मिलता था। अब 16 रुपये प्रति कॉपी मानदेय के हिसाब से मिलेगा। वहीं इंटर में 50 अंक वाले कॉपियों के मूल्यांकन में 11 रुपये मिलता था। इसे बढ़ाकर 15 रुपये प्रति कॉपी कर दिया गया है। इसी तरह से 50 से अधिक अंक वाले कॉपियों के मूल्यांकन में 14 रुपये की जगह पर 18 रुपये मानदेय तय किया गया है। प्रश्नपत्र सेटिंग का मानदेय एक हजार रुपये से बढ़ाकर दो हजार रुपये कर दिया गया है।लेबल: हिंदी समाचार, Bihar, BSEB, Children, Education, Inter, Student