वक्त भी इंसान को कितना मजबूर कर देता है यह इस चौंकाने वाली खबर से मालूम पड़ता है। फिल्म की दुनिया में तो यह हमेशा होता है। इंसान कब अर्श से फर्श पर पहुँच जाता है। खबर है की प्रकाश झा की फिल्म 'दामुल' का कलाकार बिहार की सड़कों पर अख़बार बेचने को मजबूर है। राट्रीय पुरस्कार से नवाजी गई इस फिल्म का हीरो 'बुधवा' आजकल पटना की सड़कों पर अख़बार बेचकर अपना जीवन यापन कर रहा है।
सड़को पर अखबार बेच रहे हैं बुधवा...
25 साल पहले बिहार में बिहार की समस्या पर एक ऐसी ही फिल्म बनी थी दामुल। यह फिल्म बिहार के एक गांव की समस्या पर बनी थी। इस फिल्म में दलित की भूमिका अदा करने वाले बुधवा उर्फ ओम कुमार तब अपने अभिनय को लेकर खूब चर्चा में आए थे। लेकिन, आर्थिक तंगी के कारण ये अपनी मुकाम को नहीं प्राप्त कर सके। आज ये सड़क पर अखबार बेचकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं।
आर्थिक तंगी के कारण नहीं मिला मुकाम
बुधवा उर्फ ओम कुमार आज सड़कों पर आपको अखबार बेचते मिल जाएगा। ओम कुमार कहते हैं कि इस फिल्म की सफलता के बाद कई अवसर भी मिले थे। लेकिन, डायरेक्टरों के पास बार बार आने जाने के लिए मेरे पास पैसा नहीं था। इस कारण मैं अपना मुकाम तय नहीं कर पाया। अवसर रहते हुए भी मैं इसके बाद कोई और फिल्म नहीं कर सका।
अभिनय छोड़ अखबार बेच रहे हैं
शादी जल्दी होने के कारण बच्चे भी जल्दी हो गए थे। इस लिए मैने अपने कैरियर के लिए बहुत संघर्ष नहीं कर सकता था। मजबूरी में मैंने अपना अभिनय से नाता तोड़ कर अपने पिता की ओर से प्रारंभ किए गए परंपरागत व्यवसाय (अखबार बेचेने) का काम शुरु कर दिया। तब से अभी तक बस संघर्ष ही कर रहा हूं।
प्रकाश झा की पहली फिल्म थी दामुल
प्रकाश झा की पहली फिल्म थी दामुल। इस फिल्म को नेशनल फिल्म अवार्ड से नवाजा गया था। फिल्म में बुधवा उर्फ ओम कुमार के अभिनय की हर किसी ने तारीफ की थी। देश भर के सिनेप्रेमी, समीक्षक और सिनेमा के पंडित बुधवा के अभिनय को देखकर हैरान हो गए थे।
भला कोई गांव की समस्या पर ऐसा अभिनय कर सकता है। तब बड़े-बडे समीक्षकों ने सार्वजनिक तौर पर यह घोषणा की कि हिंदी पट्टी की समस्या पर, हिंदी भाषा में, हिंदी वालों के द्वारा बनी इस फिल्म में बुधवा से अच्छा अभिनय और कोई नहीं कर सकता है।लेबल: हिंदी समाचार, Bihar, Entertainment, Film, India, Patna