छातापुर (सुपौल) रवि / सोनू । पर्यावरण संरक्षन के दृष्टिकोण से वन्य संपदा का अधिक से अधिक संख्या में होना आवश्यक है। हरे-भरे पेड़-पौधे हमारे र्प्यावरण को संतुलित रखने में काफी सहायक होते है। लेकिन विगत कई वर्षों से शहरीकरण व विकास के नाम पर अंधाधुध वृक्षो की कटाई की जा रही है जो कि गम्भीर चिन्ता का विषय है।क्षेत्र धीरे-धीरे वृक्षो की संख्या काफी घटती जा रही है परन्तु उनकी अवैध कटाई थमने का नाम नहीं ले रहा है। स्थिति की गभीरता को देखते हुए सरकार द्वारा वृक्षारोपण को एक अभियान के तौर पर चलाया गया है ताकि वुक्षों की संख्या बढाकर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखा जा सके । लेकिन आलिशान भवन आदि के निर्माण को लेकर हो रहे वृक्षो की कटाई धीरे-धीरे पर्यावरण के लिए खतरा बन सकता है। वन विभाग द्वारा प्रतिवर्ष वृक्षारोपण हेतु विशेष अभियान चलाया जाता है जिसके तहत लोगों के बीच मुफ्त में पौधे बांटे जाते है। मनरेगा के तहत भी गांवों में वृक्षारोपन का कार्य करवाया जा रहा है परन्तु उचित देखभाल की कमी व योजना में मची लूट खसोट की वजह से योजना का हश्र बुरा है।गौर करने वाली बात है कि विभिन्न समाचार पत्रों में समय समय पर व्यापक रूप से वृक्ष कटाई की खबरे प्रकाशित किया जाता रहा है ,लेकिन इतना होने के बाद भी विभाग के कान में जूं तक नहीं रेंग रहा है । निकट भविष्य में हरे वृक्षो की कमी समाज के भावी पीढ़ी के लिए यह खतरे की निशानी बन सकती है । सरकार इस मुद्दे पर लाख कोशिश कर ले लेकिन जबतक विभाग ध्यान नहीं देगी कार्य अपने गंतव्य स्थान तक नहीं पहुंच सकता है।इस तरह वृक्ष के अंधाधुन्द कटाई को रोकना बेहद जरुरी है।
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