- हाई कोर्ट की आदेश की धज़्ज़िया उड़ा 16 शिक्षक विगत 4 साल से उठा रहे है वेतन
- मामला सहरसा जिले के सलखुआ प्रखंड के मोबारकपुर पंचायत का
महेंद्र प्रसाद, सहरसा
जिले के सलखुआ प्रखंड के मोबारकपुर पंचायत में वर्ष 2006 में नियोजित कुल 19 शिक्षकों में से 18 शिक्षकों के नियोजन में भारी पैमाने पर अनियमितता किए जाने पर हाइकोर्ट द्वारा चार वर्ष पूर्व रद्द कर दिये जाने के बावजूद उक्त आदेश को ठेंगा दिखाते हुए विभागीय सांठ गांठ से अभी तक सभी शिक्षकों को नियमित वेतन देकर शिक्षा घोटाले का एक रिकार्ड स्थापित कर दिया गया है । इसका खुलासा वर्तमान पंचायत सचिव भवेश शर्मा को प्रभार मिलने के बाद हुआ । श्री शर्मा ने संबंधित सभी कागजातों के साथ प्रखंड से लेकर जिला के सभी वरीय पदाधिकारियों को आवेदन देकर कारवाई की मांग की है ।
राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2006 में सभी पंचायतों के रोस्टर तैयार कर शिक्षक नियोजन के लिए अधिसूचना निकाली गई थी । इस आलोक में सलखुआ प्रखंड के मोबारकपुर पंचायत में मुखिया , पंचायत सचिव एवं नियोजन समिति ने सभी नियम कानून को ताक पर रख आर्थिक लाभ के चक्कर में मनमानी व जालसाजी तरीके से अपूर्ण अहर्ता वाले 18 शिक्षकों के नियोजन कर दिये थे । जिसमें जहांना खातून , मोसर्रत बानो , आजरा खातून , मो. तैयब आलम , राबिया खातून ,नेमुना खातून , मो. आहिया आजमी , प्रवीण कुमार प्रवीण , लीला कुमारी , मो. रियाज अहमद , पंकज कुमार चौधरी , कंचन कुमारी ,मीना कुमारी , मनोज कुमार हेम्ब्रम , विजया लक्ष्मी यादव , हुमेरा खातून , फरमूद आलम व बीबी सुदा हैं । हाइकोर्ट ने मात्र एक प्रशिक्षित शिक्षक कृष्ण कुमार भारती को वैध माना ।
पूर्ण अहर्ता वाले नियोजन से वंचित चार अभ्यर्थी सतीश कुमार , कमर इकबाल , सहला तबस्सुम एवं अबु नसर ने उक्त नियोजन के विरोध में वर्ष 2008 व 09 में जिला शिक्षक नियोजन प्राधिकार में अलग अलग मामला दायर कर इंसाफ की गुहार लगाई । प्राधिकार ने वर्ष 2009 में चारों मामले की एक साथ सुनवाई कर अवैध रूप से नियोजन किये जाने पर संतुष्ट होकर 18 शिक्षकों के नियोजन रद्द कर नियोजन समिति पर कारवाई कर वेतन मद में शिक्षकों को दी गई राशि पंचायत सचिव से वसूलने का आदेश पारित किए थे । उक्त आदेश के विरुद्ध सभी 18 शिक्षकों ने वर्ष 2009 में अलग अलग हाइकोर्ट में अपील दायर की थी । हाइकोर्ट ने तत्काल सभी शिक्षकों को राहत देते हुए अंतिम सुनवाई तक सभी शिक्षकों को बरकरार रखा था । वर्ष 2012 में हाइकोर्ट ने इस मामले की अंतिम सुनवाई कर जिला शिक्षक नियोजन प्राधिकार द्वारा पारित आदेश पर ही मुहर लगाकर सभी 18 शिक्षकों के नियोजन रद्द कर दिया गया था । बावजूद संबंधित पदाधिकारी हाइकोर्ट के आदेश को दबा कर सरकारी राशि की दुरूपयोग करता रहा । इतने बड़े मामले का खुलासा होते देख पूर्व मुखिया,पूर्व पंचायत सचिव एवं नियोजित शिक्षकों ने नव पदस्थापित पंचायत सचिव को खरीदने की कोशिश की । लेकिन किसी का एक नहीं चला । लेकिन इन्होंने सारी सबूत के साथ वरीय पदाधिकारी को निबंधित डाक से सूचना दे दी । वर्तमान मुखिया एवं पंचायत सचिव ने आशंका जाहिर की है की उक्त सभी जालसाज मिलकर पूर्व की तिथि में फिर से नियोजन पत्र देने की तैयारी मे हैं ।
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