रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ...नमस्तस्यै नमस्तैस्यै नमस्तैस्यै नमो नम:...मां दुर्गा का सोलहों कला के साथ आज से शारदीय नवरात्र शुरू हो जाएगा। शनिवार को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की आराधना शुरू हो जाएगी।
कई दशक के बाद इस बार नवरात्र दस दिनों का है। विजयादशमी 11वें दिन है। नवरात्र में एक दिन की वृद्धि को आम श्रद्धालुओं के लिए बढ़िया माना जा रहा है। कलश स्थापना के साथ ही पूजा पंडालों और घर-घर से दुर्गा सप्तशती के श्लोक, भजन-कीर्तन गूंजेंगे। नवरात्र में भक्त नौ दिनों तक निराहार और फलाहार रहकर भी मां दुर्गा की आराधना करेंगे।
कलश स्थापना का मुहूर्त शनिवार को
सुबह 7.30 से दोपहर 12.30 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:45 से 12:32 तक
राहु काल सुबह 9:10 से 10:40 तक
अमृत और ब्रह्म योग में होगी कलश स्थापना : ज्योतिषाचार्य डॉ. राजनाथ झा के अनुसार अमृत योग और ब्रह्मयोग में कलश स्थापना होगी। द्वितीया तिथि में वृद्धि के चलते दस पूजा होगी। प्रतिपदा के बाद द्वितीया दो दिन 2 और 3 अक्टूबर को है। गुरु, चंद्र के साथ दशम भाव में कन्या राशि में अद्भुत योग बना रहे हैं। शुक्र स्वराशि होकर लाभ भाव में हैं। नवम और दशम भाव के स्वामी ग्रहों का स्थान परिवर्तन शुभ संकेत है। तृतीय व नवम भाव में राहु व केतु की उपस्थिति तंत्र संबंधी क्रियाओं में सफलता को दर्शाती है।
घोड़े पर मां का आगमन, मुर्गा पर होंगी विदा : आचार्य विपेन्द्र झा माधव के अनुसार मां दुर्गा का आगमन घोड़े पर और विदाई मुर्गा पर होगी। शास्त्रों के मुताबिक मां का घोड़े पर आगमन और मुर्गा पर प्रस्थान दोनों बढ़िया नहीं है। घोड़े पर आगमन से राजकीय सत्ता में उथल-पुथल देखी जा सकती है। देश में मारकाट, युद्ध आदि की आशंका रहेगी। वहीं मुर्गा पर विदाई रोग, शोक, दुख, महामारी आदि का सूचक बताया जाता है। इसलिए मां दुर्गा की आराधना पूरे भक्तिभाव और नियम-संयम से करना चाहिए।
दुर्गासप्तशती पाठ से प्रसन्न होती हैं मां : दुर्गासप्तशती के पाठ से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं। पूरे विधि -विधान के साथ दुर्गासप्तशती का पाठ हर दिन किया जाना चाहिए। आचार्य मार्कण्डेय शारदेय के अनुसार प्रतिपदा के दिन शाप विमोचन, कवच, कीलक और अर्गला, रात्रिसूक्त, नर्वाण मंत्र का जाप करना चाहिए। दूसरे दिन पहले अध्याय, तीसरे दिन दूस व तीसरा, चौथे दिन चौथे, पांचवें दिन पांच, छह, सात और आठवां अध्याय, छठे दिन नौवें व दसवें, सातवें दिन 11 वें अध्याय और 8वें दिन 12वें और 13वें अध्याय का पाठ करना चाहिए। नौवें दिन नर्वाण मंत्र का जाप,प्राधानिक रहस्य, वैकृतिक रहस्य, मूर्ति रहस्य,क्षमा प्रार्थना और कुंजिका स्रोत का पाठ करें। दसवें दिन हवन होगा।
मां दुर्गा के 108 नाम का जाप करें
दुर्गासप्तशती का पाठ न कर सकते हैं तो मां दुर्गा के 32 व 108 नाम का जाप करें।लेबल: Bihar, Durga Puja, Festival, Hindu, India, Navratri, Religion, World