भारतीय नौसेना की ताकत में अब और इजाफा हो गया है। भारत ने देश में बनी पहली न्यूक्लियर आर्म्ड सबमरीन आईएनएस अरिहंत को बेहद खामोशी से नेवी के बेड़े में शामिल कर लिया है। एक टीवी चैनल की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। इसके मुताबिक, सबमरीन को इसी साल अगस्त में बेड़े में शामिल किया गया। INS अरिहंत मिलने से भारत दुनिया का ऐसा छठा देश बन गया है, जिसने खुद न्यूक्लियर आर्म्ड सबमरीन बनाई है। अब तक 5 देशों अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन के पास ही न्यूक्लियर ऑर्म्ड सबमरीन थीं।
पहली न्यूक मिसाइल सबमरीन है 'अरिहंत'
अरिहंत नौसेना में शामिल की जाने वाली पहली न्यूक्लियर मिसाइल सबमरीन है। इसे विशाखापट्टनम में बनाया गया है और वहीं इसका डीप सी डाइविंग टेस्ट परीक्षण भी किया गया।
न्यूक्लियर ट्रायड से बढ़ेगी ताकत
गौरतलब है कि भारत के पास जमीन से लंबी दूरी के लक्ष्यों को निशाना बनाने वाली अग्नि मिसाइल काफी पहले से मौजूद है। इसके अलावा, परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम फाइटर एयरक्राफ्ट्स भी मौजूद हैं। लेकिन अब न्यूक्लियर ट्रायड की क्षमता हासिल हो जाने के बाद भारत समुद्र से भी परमाणु हमला करने में सक्षम हो जाएगा। इसकी यह कमी भारत की पहली स्वदेश निर्मित न्यूक्लियर सबमरीन आईएनएस अरिहंत से पूरी होगी जो इसी वर्ष अगस्त में नौसेना में शामिल की गई है।
दुश्मनों के लिए कितनी खतरनाक है अरिहंत?
इस पर K-15 या बीओ-5 शॉर्ट रेंज मिसाइलें तैनात हैं। ये 700 किलोमीटर तक टारगेट हिट कर सकती हैं। अरहिंत K-4 बैलिस्टिक मिसाइलों से भी लैस है। इन मिसाइलों को पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर कोडनेम 'के' दिया गया है। इनकी रेंज 3500 किलोमीटर तक है। यह 6 हजार टन वजनी न्यूक्लियर सबमरीन है। इससे पानी के अंदर और पानी की सतह से न्यूक्लियर मिसाइल दागी जा सकती है। पानी के अंदर से किसी एयरक्राफ्ट को भी यह निशाना बना सकती है।
मोदी ने सौंपा नेवी को...
पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, नेवी ऑफिशियल्स ने टीवी चैनल न्यूज एक्स की रिपोर्ट को खारिज नहीं किया है, हालांकि उन्होंने इसे कन्फर्म भी नहीं किया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसी साल अगस्त में नरेंद्र मोदी ने INS अरिहंत को खामोशी के साथ इंडियन नेवी को सौंप दिया। इसके बाद इसने पूरी तरह से काम करना शुरू कर दिया है। इंडियन नेवी अब उन सुपरपावर्स के क्लब में शामिल हो गई है, जिनके पास पानी और जमीन से न्यूक्लियर मिसाइल दागने की क्षमता है। इससे पहले, इस साल फरवरी में यह एलान किया गया था कि INS अरिहंत ऑपरेशन के लिए तैयार है। इस सबमरीन के टेस्ट कई महीनों तक लगातार चले थे। भारत ऐसी कुल 3 न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन बना रहा है। अरिहंत इनमें पहली है। भारत ने आईएनएस अरिहंत को दुनिया से छिपा रखा था। इसके लिए सीक्रेट ATV (एडवांस टेक्नोलॉजी वेसल) प्रोग्राम कई दशक पहले शुरू किया गया था। इस श्रेणी की दूसरी सबमरीन INS अरिधमन भी करीब-करीब तैयार है। इसे 2018 में नेवी को सौंपा जा सकता है।
भारत के लिए क्यों है जरूरी?
पाकिस्तान और चीन ने बड़े पैमाने पर न्यूक्लियर वेपन्स तैनात करने की पॉलिसी अपना रखी है। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन अपनी न्यूक्लियर सबमरीन्स की तैनाती बढ़ा रहा है। भारत की सिक्युरिटी के लिए यह चिंता का विषय है।
भारत ने दुनिया की नजरों से इसे क्यों छिपाया?
इसी साल विशाखापट्टनम में इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू ऑर्गनाइज किया गया था। इसमें कई देशों की नेवी ने हिस्सा लिया था। नरेंद्र मोदी और प्रणब मुखर्जी भी इस फ्लीट को देखने आए थे। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारत ने इस प्रोग्राम में अरिहंत को इसलिए शामिल नहीं किया, क्योंकि फॉरेन वॉर शिप्स में सेंसर और सर्विलांस डिवाइसेस मौजूद थीं। ये अरिहंत के फीचर्स को ट्रेस कर सकती थीं। नेवी इसके हर फीचर को बिल्कुल सीक्रेट रखना चाहती है।लेबल: हिंदी समाचार, India, Missile, Navy, Nuclear, Security, Submarine, World