'प्रभु' के ये अधिकारी हैप्पीनेस जंक्शन की शुरूआत कर और गरीब बच्चों को पढ़ाकर लोगों की मदद कर रहे हैं


आजकल 'प्रभु' को याद कीजिए और वो तुरंत एक ट्वीट पर हाजिर जाते हैं हो। रेल यात्रियों की मदद करने की बात आम हो गई है। लेकिन खास बात ये है कि 'प्रभु' के रास्ते पर अब उनके अधिकारी भी चल पड़े हैं। कोई हैप्पीनेस जंक्शन की शुरूआत कर तो कोई गरीब बच्चों को पढ़ाकर लोगों की मदद कर रहा है।

हैप्पीनेस जंक्शन की शुरुआत
पूर्व मध्य रेलवे (ईसीआर) के सोनपुर डिवीजन में कार्यरत सीनियर डीसीएम दिलीप कुमार और उनकी पत्नी डॉ नीतू नवगीत 'हैप्पीनेस स्टेशन' स्लोगन से बेकार पड़े सामानों को उपयोगी बनाकर गरीबों के चेहरे पर खुशी लाने की कोशिश कर रहे हैं।

सोनपुर के बाद मुजफ्फरपुर भी अब देश का दूसरा हैप्पीनेस स्टेशन हो गया है। यहां स्टेशन के भीतर और बाहर दो तरह के स्टॉल लगाकर समाज को सकरात्मक संदेश देने की कोशिश की जा रही है। मुजफ्फरपुर स्टेशन को बुधवार के हैप्पीनेस स्टेशन का नाम दिया गया। इससे पहले 18 अक्टूबर को सोनपुर स्टेशन को देश का पहला हैप्पीनेस स्टेशन का नामकरण किया गया था।

हैप्पीनेस स्टेशन का कॉनसेप्ट
हैप्पीनेस स्टेशन के कॉनसेप्ट के तहत घर के बेकार पड़े सामानों को किसी और के काम आने की सोच के साथ शुरूआत की गई है। अभियान के तहत घर के बेकार पड़े कपड़े, खिलौने, जूते-चप्पल से लेकर हरेक वो सामान जो दूसरे जरूरतमंदों के काम आ सकता है उसे उपलब्ध कराना है।

इसके लिए जंक्शन परसिर में स्टेशन से बाहर निकलते ही एक स्टॉल लगाया गया है जिसमें लोग दूसरों के लिए कपड़े और दूसरे सामान दे सकते हैं। जरूरतमंद लोग वैसे सामानों को घर ले जा सकते हैं।

अभियान के तहत रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों से लेकर आम लोगों खासकर रेलवे के यात्रियों को इस नेक काम के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। अभियान से जुड़े लोगों का मानना ​​है कि यदि आपके किसी छोटे से सामानों से किसी के घर में ढ़ेर सारी खुशियाँ पहुंचती है तो वह लोगों को आत्मसंतुष्टि पहुंचाती है।
हैप्पीनेस स्टेशन अभियान में स्टेशन परिसर का माहौल अच्छा बनाने के लिए पठन-पाठन के लिए पत्र-पत्रिकाओं का भी मुफ्त काउंटर खोला है। इस पूरे अभियान का एक ही मकसद है समाज के दोनों ही वर्गों के लोगों के चेहरे पर खुशियाँ बिखेरना। क्योंकि 'गिव और टेक' के इस खेल में देने वाला और लेने वाला बस अपने साथ खुशियां ही बटोर कर ले जाएगा।

रेलवे स्टेशन पर 'हैपिनेस जंक्शन' प्रतीक्षा कर रहे यात्रियों के लिए किताबों और विभिन्न प्रकार के मनोरंजन के साधन उपलब्ध कराये गये हैं। बच्चों के लिए 'किड्स जोन' बनाया गया है जहां छोटे बच्चों के लिए विभिन्न तरह के खिलौनों की व्यवस्था की गयी है। साथ-ही-साथ टीवी का प्रबंध भी किया गया है।

'कोशिश कुछ करने की'
हैप्पीनेस जंक्शन की तरह पटना के रेल एसपी जितेंद्र मिश्रा और उनकी पत्नी पूनम मिश्रा ने 'कोशिश कुछ करने की' नाम से एक कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस प्रोग्राम के तहत पटना और दूसरे स्टेशनोें के आस पास के गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दी जा रही है।

जितेंद्र मिश्रा ने कहा कि एक बार वो पाटलिपुत्र स्टेशन जा रहे थे और स्टेशन के आसपास उन्हें काफी झुग्गियां दिखीं। वो और उनकी पत्नी ने सोचा कि क्यों ना इन बच्चों के लिए किया जाए। लिहाजा 15 अगस्त 2016 को कोशिश कुछ करने की नाम से एक कार्यक्रम की शुरूआत की गई।

500 से ज्यादा गरीब बच्चों को शिक्षा
पटना और आसपास के स्टेशनों पर काफी संख्या में बच्चे स्टेशनों पर पढ़ने के लिए पहुंच रहे हैं। इस कार्यक्रम के तहत अलग अलग स्टेशनोें पर 500 से ज्यादा बच्चोें को शिक्षा दी जा रही है। पाटलिपु्त्र स्टेशन पर 203, पटना जंक्शन पर 40, राजेंद्र नगर पर 105, आरा जंक्शन पर 36, मोकामा में 30 और तरेगाना स्टेशन पर करीब 65 छोटे गरीब बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।

ये सभी बच्चे गरीब परिवार से हैं और इनके अभिभावक भुट्टा बेचने, सब्जी बेचने और रेहड़ी लगाने का काम करते हैं। इन बच्चों को शाम में 4-6 के बीच स्टेशन पर पढ़ाया जाता है। इन बच्चों को कम्पिटिशन की तैयारी कर रहे छात्रों की मदद से शिक्षा दी जा रही है।

रेलवे पुलिस के अधिकारी और दूसरे लोग भी बच्चों को पढ़ाने में मदद कर रहे हैं। राजेंद्र नगर स्टेशन पर तैनात रेल पुलिस अधिकारी अजय कुमार खुद ड्यूटी के दौरान समय निकालकर बच्चों को पढ़ाते हैं। अजय कुमार के अनुसार बच्चों को लाना और फिर सुरक्षित घर पहुंचाना एक चुनौती है लेकिन इस काम में हमलोगों को कुछ लोग मदद कर रहे हैं।

रेल एसपी जितेंद्र मिश्रा के अनुसार पढ़ाई के लिए प्रतिदिन बच्चे आ रहे हैं और इनमें काफी बदलाव देखा जा रहा है। इसका मकसद गरीब बच्चों को पढ़ाने के साथ साथ स्टेशनों पर क्राइम की वारदातों पर रोक लगाना है।

कार्यक्रम को शुरू हुए लगभग तीन महीने हो गए हैं और कई लोग इससे जुड़ने और मदद करने की इच्छा जता चुके हैं। जितेंद्र मिश्रा के अनुसार बिहार के सासाराम स्टेशन 500 के पर करीब बच्चे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने के लिए शाम में इक्ट्टा होते हैं। हमलोगों की कोशिश हैं कि इन छात्रों की भी किसी तरह मदद की जाएं

लेबल: , , , , , , , , , , , , , , , , ,