बाढ़ के बाद भले ही गंडक नदी के जलस्तर में कमी आई हो, लेकिन उसके पानी की रफ्तार आज भी दहशत फैला रही है। बिहार के गोपालगंज जिले के कालामटिहनिया पंचायत के लोग पिछले एक सप्ताह से इसी दहशत में जी रहे हैं। नदी अपने किनारे पर तेज कटाव कर रही है, जिसके चपेट में खेत-खलिहान और घर तक आ रहे हैं। इसी क्रम में गुरुवार को 70 साल पुराना शिव मंदिर चंद सेकेंड में नदी में समा गया।
नदी में समा गए भोले बाबा
पानी मंदिर की नींव को पहले ही अपने साथ बहा ले गई थी। नींव बहने के बाद मंदिर के कुछ पाए टूट गए थे। पाए टूटने के बाद मंदिर अस्थिर हुआ और छत से मलवा गिरने लगा। इसके बाद तेज आवाज के साथ मंदिर का एक हिस्सा पहले धरासायी हुआ इसके बाद दूसरा हिस्सा और अंत में गुंबद नदी में समा गया।
मंदिर के पास जमा थे गांव के लोग, उन्हें पता था होगा ऐसा
नदी द्वारा किए जा रहे कटाव को देखते हुए विशंभरपुर गांव के लोगों को इस बात का अंदेशा था कि मंदिर किसी भी समय पानी में समा जाएगी। गुरुवार सुबह से ही गांव के लोग मंदिर के आसपास जुट गए थे। अपनी आंखों के सामने मंदिर को नदी में समाता देख लोग शोर मचाने लगे। महिलाएं भगवान शिव को याद करने लगीं तो युवक धरासायी हुए मलबे के पास गए। लोग सहसा यकीं नहीं कर पा रहे थे कि 70 साल पुराना उनका शिव मंदिर अब मात्र मलबे का ढेर ही रह गया है और भोले बाबा गंडक नदी में समा चुके हैं।लेबल: हिंदी समाचार, Bihar, Block, Flood, Gandak, Gopalganj, Hindu, Panchayat, Religion, River, Temple, Village, Water