नोटों की किल्लत देखकर 85 साल के इस बुजुर्ग ने उठाया ये कदम, लोग देखकर हुए हैरान..जानिए

पांच सौ और हजार रुपये के नोट पर रोक लगने के बाद एक तरफ जहां कुछ लोग पुराने नोटों को बदलने और नये नोट लेने के लिए हर हथकंडे अपना रहे हैं। वहीं लोगों के बीच कुछ राहत पहुंचाने के लिए गुरुवार को 85 साल के जगत सिंह जैन स्टेशन चौक के सामने के तीसरे तल पर स्थित पंजाब एंड सिंध बैंक पहुंचे और बैंक मैनेजर के सामने सौ-सौ के नोट की गड्डियां रख मिसाल पेश किया।

80 हजार रुपये के 100-100 के नोट जमा करने पहुंचे इस बुजुर्ग को देख बैंककर्मी और वहां मौजूद लोग अचरज में पड़ गए। सभी ने तत्काल उन्हें कुर्सी दी। इसके बाद बुजुर्ग ने बैंक में पैसा जमा कर दिया। इधर चेस्ट से पैसा लेकर पहुंचे बैंक के वरीय प्रबंधक शैलेंद्र कुमार को जब जानकारी मिली तो वे तत्काल बुजुर्ग की दुकान पर गए और उनका आभार व्यक्त किया।

लोगों की सहायता करने का जज्बा
लगभग 80 हजार रुपये उन्होंने बैंक मैनेजर को देते हुए कहा कि इसे मेरे खाते में जमा कर दीजिए, कम से 40 लोगों कम को तो इससे दो-दो हजार रुपये मिल जाएंगे। बैंककर्मी भी बुजुर्ग की सह्रदयता देख हैरत में थे। जगत सिंह जैन स्टेशन चौक के पास बाटा गली में नवकर टैक्सटाइल्स की दुकान मालिक हैं के।

बेटों द्वारा कारोबार संभालने के बाद वे दुकान पर बहुत कम बैठते हैं। नोटबंदी के बाद पैसे की किल्लत की खबरों ने उन्हें इतना विचलित किया कि वे अपने बचत के रुपयों को लेकर बैंक पहुंच गए। जगत सिंह ने जब बैंक मैनेजर के सामने रुपयों से भरा झोला रखा तो हतप्रभ मैनेजर ने कहा, इसे रखिए। यह आपके काम आएगा। अभी तो लोग बड़े नोट जमा कर रहे हैं। मगर जगत सिंह अपनी जिद पर अड़े रहे।

लोगों के लिए सबक
जगत सिंह की जिद के आगे बैंक मैनेजर को झुकना पड़ा। इसके बाद बैंक कर्मियों ने उन्हें आदरपूर्वक बिठाया, पानी पिलाया, चाय पिलायी और पैसे जमाकर पर्ची दी। जगत सिंह जैन के इस कदम की जानकारी जब पटना स्थित पंजाब एंड सिंध बैंक प्रबंधन को मिली तो वहां से ब्रांच मैनेजर शैलेंद्र कुमार को निर्देश मिला कि बुजुर्ग जगत सिंह के घर जाएं और बैंक की तरफ से उनका आभार व्यक्त करें। इसके बाद देर शाम बैंक मैनेजर उनकी दुकान पर पहुंचे।

सबने की सराहना
बकौल जगत सिंह, जब भी ऐसी खबरें देखता था तो लगता था कि संकट की वजह सौ रुपए के नोटों की कमी है। इसके बाद उन्होंने तय किया कि इस संकट से मुकाबले के लिए कुछ करना चाहिए। इसके बाद वे अपनी दुकान पर पहुंचे और गल्ले में पड़े सौ रुपए के आठ बंडल एक झोला में रखे और बैंक पहुंच गए।

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