पेट्रोल-डीजल-केरोसिन और LPG से चलती है ये तीन चक्के वाली मोटर साइकिल

इंटरनेट की दुनिया में नित नयी-नयी जानकारी से लोग अपडेट रहे हैं हो। वहीं मशीनरी क्षेत्र में भी नये-नये अविष्कार दिन प्रतिदिन रहे हैं हो। इसी कड़ी में बिहार के कटिहार में इनदिनों एक अनोखी बाइक सबका ध्यान अपनी ओर खिंच रही है। खास बात यह कि ये बाइक तीन पहिए वाली है और एक खास बात ये भी कि ये अनोखी बाइक पेट्रोल के अलावा डीजल, केरोसिन और एलपीजी से भी चलती है।

जानिए किसने और कैसे बनाई ये बाइक
कटिहार रामपाड़ा के रहने वाले इजहार अली ने ये बाइक बनवाई है। उन्होंने बताया कि इस तरह की बाइक बनाने का आइडिया उन्हें अजय देवगन की फिल्म गोलमाल देखकर आया था। इजहार ने बताया कि फिल्म देखने के बाद उन्होंने कबाड़ से एक इंटायसर बाइक 15 हजार रुपए में खरीदी और फिर उसे ऐसा बनवाया।

बाइक बनवाने में किया अलग-अलग गाड़ी के पार्ट्स का यूज
इजहार ने बताया कि पुरानी बाइक के कई पार्ट्स खराब थे। इसके बाद इसे ठीक करने के लिए कई और बाइक्स के पार्ट्स को इसमें यूज किया। उन्होंने बताया कि इस अनोखी बाइक को बनाने के लिए वे कई दिनों तक घूमते रहे थे, जहां बाइक के लायक पार्ट्स मिल जाता उसे ले लेते थे। उन्होंने बताया कि बाइक को ऐसा बनाया गया है कि वो पेट्रोल के अलावा डीजल, केरोसिन और एलपीजी से भी चल जाती है। इजहार ने बताया कि बाइक के ऑरिजनल टंकी को निकाल कर उसे ज्यादा बड़ा बनाया गया है। टंकी को बीच से बांट कर दो हिस्सों में कर दिया गया है। एक पेट्रोल के लिए तो दूसरा केरोसिन और डीजल के लिए। इजहार ने बताया कि जिस सोर्स से बाइक चलानी होती है उसे मेन फ्यूल टंकी में डाल दिया जाता है।

टूल बॉक्स और बैटरी की जगह लगाया सीएनजी किट
इजहार ने बताया कि बाइक की खासियत ये है कि टूल बॉक्स और बैटरी की जगह सीएनजी किट का यूज किया गया है। किट को 3200 रुपए में खरीदा गया है। एलपीजी से बाइक को चलाने के लिए फायर एस्टिंगिशर का खाली डब्बा यूज किया गया है। इसमें एलपीजी डाला गया। फिर एलपीजी के डब्बे को भी टूल बॉक्स की जगह लगाया गया। इस किट के जरिए गैस को ट्रांसफर किया जाता है। इजहार ने बताया कि बैटरी को सीट के नीचे लगाया गया है।

कई लोगों का रहा सहयोग
शुरू में इस तीन पहिया वाहन को बनाने का काम मो इजहार अली व सद्दाम ने शुरू किया। धीरे-धीरे काम बढ़ने के कारण और लोगों को भी इसमें शामिल किया गया। इसमें मो साबिर, मो मंजर आलम, मो तबारक, मो नुरूल, मो सलाम का सराहनीय योगदान रहा है। इस वाहन का अधिकांश मेटेरियल नेपाल, बंगाल व दिल्ली से मंगाया गया है। अब भी इस वाहन को बेहतर बनाने के लिए प्रयास किया जा रहा है।

बाइक चलाने के लिए एसडीओ से लेना पड़ा आदेश
इजहार ने बताया कि बाइक के पेपर्स दो पहिए के हैं। इसलिए इसे चलाने के लिए एसडीओ से फिलहाल दो महीने का आदेश लिया है। उन्होंने बताया कि इस बाइक के लिए परमानेंट पेपर्स बनवाने की कवायद जारी है। इजहार ने बताया कि इस बाइक का रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है। इसे उन्होंने अपने ही ग्रील फैक्ट्री में बनवाया है। उन्होंने बताया कि अगर लोगों को या फिर किसी कंपनी को इसकी जरुरत हुई तो मैं मॉडल दे सकता हूं। उन्होंने बताया कि वे जल्द ही अपने इस प्रोजेक्ट को रजिस्टर्ड कराएंगे। इजहार के मुताबिक, वे एक सोशल वर्कर हैं। उन्होंने ऐसी बाइक इसलिए बनाई कि उसे देखकर लोग उनतक पहुंचे फिर वे अपनी बात उनतक पहुंचा सके।

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