धार्मिक सौहार्द्र और कौमी एकता की मिसाल पेश कर बिहार के इस गांव में मुस्लिम करते हैं छठ

बिहार के सबसे बड़े पर्व छठ पूजा की तैयारियां में लोग पूरे उत्साह और श्रद्धा से जुटे हुए हैं। 'उग ​​हो सूरज देव भइले अर्घ्य के बेर', 'जोड़े- जोड़े सूपवा तोहे चढ़इवो छठी मइया', 'केरवा जे फरेला घवद से ओह पर सुगा मेंडराय' जैसे सुमधुर गीतों से छठ पूजा का उत्साह देखते बन रहा है।

इस सबके बीच गोपालगंज के थावे प्रखंड का छठ पर्व खास हैं। इस प्रखंड के चनावे गांव में कई ऐसे मुस्लिम परिवार हैं, जो कई वर्षों से छठ करते आ रहे है। हमारे देश में सांप्रदायिकता की मिसाल आज भी कायम है। ये सभी परिवार धार्मिक सौहार्द्र और कौमी एकता की मिसाल पेश कर रहे हैं। हमारे देश में सांप्रदायिकता की मिसाल आज भी कायम है। सांप्रदायिक दंगे और संप्रदाय और धर्म को लेकर लड़ने वालों पर करारा प्रहार है।

हसमुद्दीन का परिवार 3 साल से कर रहा है छठ
गांव के 40 वर्षीय हसमुद्दीन अंसारी पेशे से ड्राइवर हैं चनावे। हसमुद्दीन अंसारी का परिवार और उनके परिवार के 4 सदस्य पिछले 3 साल से छठ पर्व मना रहा है। हसमुद्दीन के मुताबिक, छठ पर्व जैसे ही नजदीक आता है।
वे अपनी पत्नी खातून नेशा और मां के साथ गांव में बने पोखरा के किनारे छठ मैया की आकृति की साफ-सफाई करते है। छठ पूजा के दिन गाना-बाजा के साथ छठ घाट पहुंचते हैं और छठी मैया की पूजा करते है।

हसमुद्दीन अंसारी बताते हैं कि उनकी चार बेटियां है। उन्होंने छठी मैया से एक बेटे की मन्नत मांगी थी। मन्नत मांगने के बाद अगले साल ही उन्हें बेटा हुआ। बेटे होने की खुशी में उनकी पत्नी बीते 3 साल से छठ करती आ रही हैं।

हसमुद्दीन की पत्नी खातून नेशा का कहना है कि छठी मैया की कृपा से उन्हें बेटा हुआ। तब से वे पिछले 3 साल से छठ पर्व मना रही है।

खातून नशा ने बताया कि उन्हें छठ पूजा के विधि-विधान के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। वे गांव की दूसरी हिन्दू महिलाओं के सहयोग से प्रसाद तैयार करती है। रीति-रिवाज पूरे अनुष्ठान से छठ पर्व मनाती है।

पिछले 10 साल से कर रही हैं छठ
चनावे गांव के हसमुद्दीन कोई अकेले मुस्लिम परिवार नहीं है जो छठ पर्व मना रहे हैं। इस गांव के अरमान अंसारी, हसीना खातून, राजा हुसैन की पत्नी शाहजहा भी बीते कई वर्षों से छठ पर्व मनाते है।

खास बात यह है कि पूरे विधि-विधान से मुस्लिम परिवार इस छठ महापर्व को करता है। राजा हुसैन की पत्नी शाहजहां दस वर्षों से बेटे होने की खुशी में छठ मना रही है।

चनावे गांव के रिटायर्ड डीएसपी नरेद्र सिंह बताते है कि वे अपने जन्म से ही जब वर्ष 1958 से उनको होश हुआ है। तब से वे गांव के सभी कौम की महिलाओं को एक साथ छठपर्व मनाते हुए देख रहे हैं।

नरेन्द्र सिंह के मुताबिक, उनके गांव में करीब 150 हिन्दू और करीब 20 मुस्लिम परिवार है जो कई वर्षों से एक साथ छठ पर्व मनाते हैं। गांव के हिन्दू ईद, बकरीद, मुहर्रम में मुस्लिम परिवार हिन्दुओं के सभी पर्व में शरीक होते है और पर्व-त्यौहार को एक साथ मनाते हैं।

नरेद्र सिंह बताते हैं कि ऐसे वक़्त जब देश में धार्मिक विद्वेष चल रहा है। तब थावे प्रखंड के यह चनावे गाव वर्षों से कौमी एकता की मिसाल पेश कर रहा है।

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