अगर आप छठ में घर नहीं आ रहे हैं तो ये वीडियो जरूर देखें...

छठ बस एक त्यौहार नहीं है। वो भावना है जिससे लोग भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं। हम देख सकते हैं कि छठ मनाने वाले लोग, जो अपने रोजी-रोटी के लिए परदेस में रहते हैं, वो किसी दूसरे किसी त्यौहार में घर जाएं न जाएं पर छठ में जरूर जाते हैं। चाहे ट्रेन में रिजर्वेशन हो या न हो। टीटी को फाइन दे देंगे, पर जाएंगे जरूर।

छठ में घर जाने के लिए बंदा ऑफिस में बॉस से भी लड़ लेता है। कुछ तो छुट्टी न मिलने पर जॉब छोड़कर भी छठ के लिए घर को निकल पड़ते हैं। चाहे वो दो पैसे कमाने वाला मजदूर तबका हो या चाहे बड़ी सैलरी वाला अफसर तबका। इसी भावना को एक वीडियो में समेटा है मिथिला मखान फेम नितिन नीरा चंद्रा ने इस वीडियो में। इस वीडियो में 'क्रांति प्रकाश झा' और 'क्रिस्टीन जेडेक' को फिल्माया गया है। भाग-दौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास त्यौहार मनाने का भी समय नहीं रहता है। ऐसे में ये वीडियो अपने सोसाइटी के लिए एक मैसेज की तरह है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो :-
'पहिले-पहिले हम कइनी छठ मईया बरत तोहार, करिहअ क्षमा छठी मईया भूल-चूक गलती हमार'। छठ को लेकर शारदा सिन्हा जी का गीत सोशल मीडिया पर इन दिनों वायरल हो रहा है जिसमें दिखाया गया है कि कैसे गांव में छठ की परंपरा निभाने में असमर्थ एक मां विदेश में रह रहे अपने बेटे को फोन करती हैं कि वो इस बार शारीरिक अस्वस्था की वजह से छठ नहीं कर सकती इसीलिए घर आकर क्या करोगे?

बेटे का उदास चेहरा देखकर विदेश में रह रही आधुनिक बहू छठ करने का सोचती है और पति-पत्नी सोशल मीडिया के जरिए सारे विधि-विधान को गूगल पर सर्च कर छठ की विधिवत पूजा करते हैं। इस वीडियो में शारदा सिन्हा की मखमली आवाज का जादू है और हमारी परंपराओं को निभाने की सीख भी।

महापर्व छठ के गीतों का पर्याय मानी जाने वाली स्वर-कोकिला पदमश्री शारदा सिन्हा का ये नया गीत नए कलेवर में तो जरूर है, मगर अपनी मिठास और पारंपरिकता से भरपूर है।

शारदा सिन्हा के वीडियो को देखिएगा तो मालूम पड़ेगा कि ये आज के बिहार के हर घर की कहानी है।

इस तरह शारदा सिन्हा के इस नए गीत ने वर्तमान बिहारी परिवार और छठ के प्रति उसकी अगाढ़ आस्था को बड़े सुरीले अंदाज में पेश किया है। इस गीत के माध्यम से ये भी बताने की कोशिश की गई है कि छठ हमारे बिहारी परिवार की परंपरा में किस तरह शामिल है। जिसे बाद में घर के नए सदस्य भी बड़े आस्था और सहजता से अपना लेते हैं। शारदा सिन्हा का ये नया गीत:  



सामाजिक परंपरा और आपसी सौहार्द्र का पर्व है छठ
शहर में लोग अब स्विमिंग पूल या छत पर ही थोड़ा पानी इकट्ठा कर छठ का अर्घ्य दे देते हैं, लेकिन छठ की परंपरा में सामाजिक सौहार्द्र और एक-दूसरे के प्रति सहयोग की जैसी मिसाल देखी जाती है और किसी पर्व में नहीं दिखती, जो अब शहरीकरण की वजह से बदलती जा रही है। हम अपनी परंपराओं में खुद ही सेंध लगाने पर तुले हैं।
नदी के किनारे या तालाब के किनारे दूर-दूर से आकर एक साथ मिलकर छठ की पूजा करना एक साथ अर्घ्य देना एक-दूसरे को प्रसाद देना, खासकर जिनके यहां छठ की पूजा ना हुई हो उनके घर छठ का प्रसाद जरूर भेजना ये सब समाज में भाईचारे और सहयोग की भावना की शिक्षा देती है।

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