छठ में इस मुस्लिम महिला की फैमिली रहती है चर्चा में, जानिए....

हमारे देश में सांप्रदायिकता की मिसाल आज भी कायम है। सांप्रदायिक दंगे और संप्रदाय और धर्म को लेकर लड़ने वालों पर करारा प्रहार है - छठ पूजा में एक मुस्लिम महिला का मिट्टी का चूल्हा बनाना और इसके लिए छठ के नियम का पालन करना। इस पूजा में यह एकता की मिसाल बिहार में देखने को मिलती है जो लोगों के लिए सीख है।

एक महीने से छठ का नियम मानती हैं मुस्तकीमा
पटना की मुस्तकीमा खातून छठ से एक महीने पहले से परहेज में रहने लगती हैं। पूरा परिवार बिल्कुल सात्विक भोजन करता है। खाने में प्याज-लहसुन से भी परहेज। पिछले 10 साल से मुस्तकीमा ऐसा कर रही हैं।

छठ पूजा के लिए बनाती हैं मिट्टी का चूल्हा
मुस्तकीमा खातून हर साल कार्तिक और चैती छठ में प्रसाद बनाने के काम आने वाला मिट्‌टी का चूल्हा बनाकर बेचती हैं। व्रत करने वाली महिलाओं को सहयोग करती हैं अौर घाट तक जाने के लिए अपना ठेला भी देती हैं।पटना के वीरचंद पटेल पथ में चूल्हा बनाकर बेचने वाली कमला नेहरू नगर की मुस्तकीमा छठ पर्व के प्रति अपनी आस्था के जरिए धार्मिक सद‌भाव की अनूठी मिसाल हैं।

पुनपुन नदी के किनारे से लाते हैं मिट्टी
उन्होंने बताया कि मिट्‌टी के चूल्हे पर व्रती खरना का प्रसाद बनाते हैं। चूल्हे बनाने के लिए ये पुनपुन नदी के किनारे के खेतों से मिट्टियां लाते हैं। इसे वीरचंद पटेल पथ के फुटपाथों के किनारे गिराया जाता है। दो माह पहले से ही चूल्हा बनाने का काम शुरू हो जाता है। छठ के कुछ दिन पहले से लेकर खरना तक इनकी बिक्री होती है। मुस्तकीमा खातून बताती हैं कि मिट्टी का चूल्हा बनाने के काम में उनकी बहू नजमा खातून भी सहयोग करती हैं।

बेटे की बिमारी के बाद छठ के दिलावाती हैं अर्घ्य
मुस्तकीमा ने बताया कि पति मो. असलम चमड़ा गोदाम में काम करते हैं और ठेला चलाते हैं, लेकिन छठ के दौरान सिर्फ एक काम चूल्हा बनाने में सहयोग करते हैं। उन्होंने बताया कि बेटे मो. इकबाल को कुछ सालों पहले सफेद दाग हो गया था। लोगों ने छठ मैया की महिमा बताई और उन्हें सूप का अर्घ्य दिलवाने की बात की। इस उम्मीद में कि सूर्य देवता उसकी अर्ज जरूर सुनेंगे। यह पांचवां साल है।

इस बार मुस्तकीमा छठ के लिए पांच सूप देकर अर्घ्य दिलवाने की तैयारी कर रही हैं। मुस्तकीमा बताती हैं कि उनके द्वारा बनाया मिट्टी का एक चूल्हा 50-60 रुपए में बिकता है। इससे करीब पांच से छह हजार रुपए की कमाई हो जाती है।

यही नहीं मुस्तकीमा के अलावा फूला खातून, शाहिदा खातून, मो. चांद, लाला मिया, मो. कमरू समेत करीब 20 परिवार ऐसे हैं, जो वीरचंद पटेल पथ में छठ के दौरान मिट्‌टी के चूल्हे बनाकर बेचते हैं।यहां आकर देखने से धर्म और संप्रदाय की बात बेमानी लगती है। एक मुस्लिम महिला के हाथों से बना मिट्टी के चूल्हे पर हिंदु के पवित्र पावन पर्व छठ का प्रसाद बनता है तो मुस्लिम के घर में छठ के अर्घ्य की तैयारी होती है।

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