बिहार के लाल राजीव ने ओसिनिया के कार्सटेंस्ज शिखर पर फहराया तिरंगा

बिहार में प्रतिभावानों की कमी नही है, बिहार के युवा हर जगह अपना परचम अपने कार्यो की बदौलत लहराते रहे हैं। आज हम बात कर रहे है बिहार के दरभंगा के मशहूर पर्वतारोही राजीव सौमित्र ने आस्ट्रेलिया-ओसिनिया के सर्वोच्च पर्वत शिखर कार्सटेंस पर तिरंगा फहराया है। दरभंगा के जोगियारा पतोर निवासी राजीव सौमित्र ने गत 22 नवंबर की सुबह साढ़े आठ बजे कार्सटेंस पिरामिड पर कदम रखा। सफल अभियान के बाद बुधवार को भारत लौटने पर राजीव सौमित्र ने बताया कि कार्सटेंस पिरामिड (8848 फीट) माउंट एवरेस्ट से भी ज्यादा खतरनाक और तकनीकी रूप से दुर्गम है। उन्होंने सेवेन सम्मीट अभियान के तहत अब तक माउंट एवरेस्ट समेत विश्व के पांच अलग-अलग महादेशों के सर्वोच्च पर्वत शिखरों को फतह किया है। कार्सटेंस पिरामिड इंडोनेशिया के पश्चिमकी पापुवा प्रांत के न्यू गुनिया द्वीप पर स्थित है। दिल्ली के पारामाउंट लीग के चेयरमैन राजीव सौमित्र ने मुजफ्फरपुर के आर.डी.एस.कॉलेज से भूगोली में स्नातक प्रतीष्ठा की पढ़ाई पूरी की थी।

राजीव सौमित्र को इस अभियान को पूरा करने में चार दिन लगे हैं। गत 21 नवंबर की रात इंडोनेशिया के समयानुसार साढ़े 12 बजे बेस कैंप से ऊपर चढ़ना शुरू किया और सुबह साढ़े आठ बजे कार्सटेंस पिरामिड की चोटी पर कदम रखा। उन्होंने शिखर पर तिरंगा फहराने के बाद पारामाउंट लीग का बैनर भी लहराया। इस पर्वत के पहले बेस कैंप तक घने भयानक जंगल से गुजरना पड़ा, जबकि ऊपर की तकनीकी चढ़ाई भी बहुत कठिन थी। खड़ी चढ़ाई में वर्षा और बर्फबारी के बीच कदम-कदम पर खतरा मंडराता रहा। राजीव सौमित्र ने बताया कि अब वे आगामी जनवरी में सेवेन सम्मीट के छठे चरण में दक्षिणी अमेरिका के सर्वोच्च शिखर एकांकागुआ पर चढ़ेंगे।

राजीव सौमित्र के सफल अभियान...



क्या होता है सेवेन सम्मीट
पर्वतारोहियों के जीवन का सबसे बड़ा सपना विश्व के सात महादेशों के सर्वोच्च शिखरों को फतह करना होता है। जेट एयर तूफान, सर्वाधिक ऊंचाई और बर्फिली राहों व दर्रों पर सीधी चढ़ाई के कारण माउंटर एवरेस्ट का अभियान सबसे कठिन माना गया है, परन्तु सेवेन सम्मीट के दूसरे अभियान भी बेहद खतरनाक हैं। राजीव सौमित्र उनमें से पांच शिखरों को फतह कर चुके हैं।

बेटा हर्षित का है वर्ल्ड रिकार्ड
राजीव सौमित्र के इकलौते पुत्र हर्षित सौमित्र ने मात्र पांच वर्ष 11 महीने की उम्र में माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप पर कदम रखकर सबसे कम उम्र मकें बेस कैंप तक पहुंचने का विश्व रिकार्ड बनाया। हर्षित 17 नवंबर 2014 को एवरेस्ट के बेस कैंप पर कदम रखा था। लौटने पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उसे शाबासी दी। निर्भिक बालक हर्षित की सफलता की कहानी दिल्ली के स्कूलों में पढ़ाई जाती है।

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