सिर्फ 1100 रुपये में बेटी की शादी, चाय और लड्डू से बारातियों का स्वागत...

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नोटबंदी के बाद विपक्षी पार्टियां सदन से लेकर सड़क तक हंगामा कर रही हैं और बता रही हैं कि विवाह करने वाले परिवारों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन इसके ठीक विपरीत केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले को सही ठहराते हुए बिहार के कटिहार में मनसाही चितौड़िया गड़ीघाट गांव निवासी एक पिता ने बेटी की शादी महज ग्यारह सौ रुपये में रचाकर मिसाल कायम किया।

शादियों में होने वाले खर्च किसी से छिपे नहीं है। लाखों और करोड़ों रुपये के खर्च दहेज और चमक-दमक में किए जाते हैं। ऐसे में सुनने में ये थोड़ा अजीब-सा लगता है, परंतु हकीकत है कि बिहार के कटिहार जिले के मनसाही प्रखंड में एक ऐसा विवाह गुरुवार रात संपन्न हुआ, जहां मात्र 1,100 रुपये खर्च किए गए।

गुरुवार को पहुंची बारात का स्वागत दावत के रूप में 56 तरह के पकवानों की जगह सिर्फ चाय और एक लड्डू देकर किया गया और शादी पूरी सादगी और रस्मों-रिवाजों के बीच एक घंटे में पूरी हो बारात दुल्हन लेकर विदा भी हो गयी।

चितौड़िया के रहनेवाले योगेन्द्र सहनी की पुत्री सरस्वती कुमारी की शादी गांव के ही मुंशी सहनी के पुत्र राजा कुमार से तय हुआ था। सभी पिता की तरह योगेंद्र ने भी अपनी बेटी की शादी में बारातियों के स्वागत के लिए कई तरह के पकवान बनाने तथा बेटी की खुशी के लिए कई तरह के दान देने के सपने संजोए थे, परंतु अचानक नोटबंदी की घोषणा से उनके सपने पर पानी फिरता नजर आने लगा। यह बात उनके होने वाले रिश्तेदार मुंशी सहनी को मालूम हुई। मुंशी सहनी ने योगेंद्र से कहा कि शादी तय तिथि पर होगी और हुआ भी वही।

गुरुवार को दिन के 12 बजे राजा अपनी बारात लेकर लड़की वाले के यहां पहुंचे और बिना दहेज और भोज के ही रात को राजा और सरस्वती का विवाह संपन्न हो गया। चितौरिया पंचायत के मुखिया दीपनारायण पासवान ने बताया, 'में मिसाल बनी इस शादी में पंडित तक नहीं था क्षेत्र। बस अग्नि को साक्षी मानकर महज दो घंटे में यह शादी संपन्न हो गई। '

दुल्हन बनीं सरस्वती कहती हैं, 'प्रधानमंत्री मोदी के नोटबंदी के फैसले से काफी परेशानी हुई थी, क्योंकि हमारी शादी की तिथि तय हो चुकी थी। उसके बाद हमने शादी को कम से कम खर्च में निपटाने का फैसला किया और बिना किसी दिखावे के मेहमानों को केवल चाय-पानी और लड्डू ही दिया। ' इस शादी की खास बात यह रही कि बारातियों ने लड़की पक्ष की ओर से किए गए इंतजाम को खुशी-खुशी स्वीकारा और बिना किसी शिकायत के वर-वधु को आशीर्वाद दिया।

दुल्हन के पिता योगेंद्र कहते हैं, 'लड़की की शादी के लिए 350 रुपये की साड़ी और लड़के के लिए 400 रुपये का कपड़ा और बारातियों के स्वागत के लिए 150 रुपए का लड्डू और दो सौ रुपये में चाय की व्यवस्था की गई।' शादी में शामिल लोगों ने भी इस प्रकार के विवाह की सराहना की और कहा कि इस तरह के विचार से देश में फैले दहेज रूपी दानव को समाप्त किया जा सकता है। बारात में आये लोग इस शादी से खुश भी थे। इस शादी में भारी खर्च के साथ-साथ सभी का समय भी बच गया।

शादी के समारोह में शामिल होने आये पंचायत के पंचायत समिति सदस्य दीपा देवी एवं समाजसेवी भोला साह ने वर वधू को आशीर्वाद दिया। इस प्रकार की शादी से फालतू खर्च भी कम होंगे। शादी समारोह में पंचायत के मुखिया दीपनारायण पासवान, जितेन्द्र पासवान, परमानंद ठाकुर, सुजन यादव, मदन सिंह, रमेश चन्द्र यादव, शिशुपाल सिंहं, संजय कुमार, आलमगीर, रामानंद ठाकुर एवं सुरेश यादव आदि ने भाग लिया।

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