हिन्दुस्तान में हिन्दी भाषा को माँ का दर्जा प्राप्त है । हिन्दी सिर्फ एक भाषा नहीं है बल्कि एक ऐसी मजबूत धागा है जो लोगों को एक-दुसरे से जोड़ती है। हिन्दी को राष्ट्रभाषा, राजभाषा, सम्पर्क भाषा और जनभाषा होने का गौरव प्राप्त है साथ ही अब इन सबको पार कर हिन्दी विश्व भाषा बनने की ओर अग्रसर है । इसी सपने को हकीकत में बदलने के मकसद से बिहार की एक बेटी अनुपमा कुमार ज्योति विदेशों में हिन्दी के प्रचार-प्रसार में लगी है, वह भी अंग्रेजी धरती ब्रिटेन में जो अंग्रेजी भाषा की जन्मभूमि है।
इसी कड़ी में ब्रिटेन के युवा वर्ग को हिन्दी लेखन के लिए प्रोत्साहित करने के लिए लंदन की युवा लेखक व बिहार की बेटी अनुपमा कुमार ज्योति और उनकी टीम ने कार्यशाला का आयोजन किया। मुख्य अतिथि बिहार की बेटी और गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा थीं।
लंदन में आयोजित कार्यशाला में मृदुला सिन्हा ने अपने शुरुआती लेखन की बातों को बहुत रोचक ढंग से सुनाया। साथ ही राजनीतिक जीवन की जानकारी दी। कहानीकार तेजेन्द्र शर्मा ने कार्यशाला का संचालन किया। मौके पर प्रवासी संसार के संपादक राकेश पांडेय, भारतीय उच्चायोग के हिन्दी एवं संस्कृति अधिकारी तरुण कुमार और मृदुला सिन्हा के पति प्रो. सिन्हा भी मौजूद थे। इसी कड़ी में ब्रिटेन की संसद (हाउस ऑफ कॉमन्स) में तीन दिवसीय प्रवासी सम्मेलन के पहले दिन ‘प्रवासी संसार के एक दशक पूरा होने का जश्न मनाया गया। यहां भी मुख्य अतिथि थी मृदुला सिन्हा। मेजबान वीरेन्द्र शर्मा (ब्रिटिश सांसद) भी मंच पर मौजूद थे।
भारत से किशोरी लाल शर्मा, भारतीय उच्चायोग के सुनील कुमार, काउंसलर जकिया जुबैरी (एशियन कम्यूनिटी आर्ट्स, अध्यक्ष), सन्मुख सिंह बख्शी(अध्यक्ष- काव्यधारा), जय वर्मा (अध्यक्ष- काव्यरंग) और राकेश पाण्डेय उपस्थित थे। ब्रिटेन में सक्रिय संस्थाओं, अध्यापकों, लेखकों को उनके उल्लेखनीय कार्य के लिए मृदुला सिन्हा ने सम्मानित किया। इनमें प्रो. डॉ. कृष्ण कुमार (गीतांजलि), दिव्या माथुर (वातायन), रवि शर्मा (मीडिया), कैलाश (मीडिया), श्याम मनोहर पाण्डेय, देविना ऋषि, सुरेखा चोपला, डॉ. अरुणा अजितसरिया, गीता शर्मा (सभी शिक्षण), सोहन राही, निखिल कौशिक, अरुणा सब्बरवाल, स्वर्ण तलवाड़, तोषी अमृता, इंदिरा आनन्द,अनुपमा कुमार ज्योति आदि शामिल थे।लेबल: जरा हट के, हिंदी समाचार, Bihar, Bihari, Hindi, India, Language, UK, Women, World