बिहार के लाल शांतनु का मोबाइल एप बताएगा कैसे बढ़ेगा आपका पैसा

महत्वपूर्ण यह नहीं कि आपने कितना कमाया है, बल्कि देखना यह है कि कमाया हुआ धन आप कितना सहेज पाते हैं, यह धन आपके कितना काम सकता है और यह आगे कितनी जेनरेशन आप तक टिक पाएगा। अमेरिकन बिजनेसमैन और इन्वेस्टर रॉबर्ट कियोसाकी का यह विचार किसी भी उस व्यक्ति पर लागू होता है, जो वित्तीय स्थिति पर गौर करता है, मजबूत करने का प्रयास करता है। लेकिन, अपने देश की स्थिति थोड़ी अलग है।

यहां वित्तीय मामलों में अज्ञानता का आंकड़ा कहीं ऊपर है। आबादी का एक बड़ा हिस्सा, अपना कमाया हुआ धन सहेजने में ही परेशान रहता है, निवेश उसके बूते के बाहर की चीज है। जबकि वित्तीय मामलों के जानकार बताते हैं कि बिना सही निवेश वेतनभोगी अपने कई उद्देश्यों को पूरा नहीं कर सकता। आम लोगों में निवेश की अज्ञानता दूर करने का उपाय ढूंढा है बिहार के पटना के शांतनु विभोर ने। शांतनु एक ऐसे मोबाइल एप पर काम कर रहे हैं, जो लोगों को वित्तीय निवेश की तर्कपूर्ण और शोधपरक जानकारी देगा।

उन्होंने कहा कि बड़े इन्वेस्टर्स के पास फंड होता है, लेकिन छोटे स्तर पर इन्वेस्ट करने वाले फंड डूबने के डर से इन्वेस्ट नहीं कर पाते। इसी डर को निकालने के लिए हम डीप पॉकेट्स मोबाइल एप पर काम कर रहे हैं। इसमें किस इन्वेस्टमेंट में कितने फायदे होंगे, इसकी पूरी जानकारी रहेगी।

जुलाई तक तैयार होगा ऐप...
- अमेरिका की हेज फंड और प्राइवेट इक्विटी इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट कंपनी डीई शॉ में पांच साल तक काम कर चुके शांतनु बताते हैं कि देश में एक बड़ा तबका है, जो निवेश के तरीकों की जानकारी नहीं होने के कारण आगे नहीं बढ़ पाता।

25 से 40 वर्ष के युवाओं को मिलेंगे निवेश के विकल्प
- शांतनु बताते हैं कि देश की जीडीपी ग्रोथ का सीधा फायदा देश की बड़ी जनसंख्या को नहीं मिलता है, क्योंकि वो सीधे तौर पर जीडीपी में अपना इन्वेस्टमेंट नहीं करती है।
- शेयर मार्केट में पैसा लगाना छोटे निवेशकों के लिए आज बहुत फायदेमंद नहीं है। क्योंकि बीच के वेल्थ मैनेजर्स और कंपनियों के कमीशन के रूप में निवेशकों को तय भुगतान करना ही होता है, फायदे या नुकसान पर निर्भर नहीं होता।
- हमारी कोशिश यही है कि वेतनभोगी 25 से 40 वर्ष के युवा, जो मोबाइल फ्रेंडली भी हैं और आर्थिक समझ भी रखते हैं, उन तक निवेश के विकल्प और तरीके पहुंचा सकें।

नौकरी छोड़ने के बाद मिला यह आइडिया
- शांतनु बताते हैं कि 2013 में अपना कुछ करने के लिए मैंने डीई शॉ की नौकरी छोड़ी।
- तब मैंने रेगुलर इनकम प्राप्त करने के लिए अपने पास पड़े पैसों को इन्वेस्ट करने की सोच रहा था।
- मैंने वेल्थ मैनेजर्स से बात की, लेकिन सबने मुझे वो चीजें बताईं जिनमें उन्हें अधिक कमीशन मिलता।
- जब इंवेस्टमेंट मैनेजमेंट सेक्टर में काम करने के बाद भी मुझे ऐसी चीजें ऑफर हुईं तो मैंने सोचा कि आम निवेशकों को भी परेशानी जरूर होगी।
- इसके बाद मैंने निर्णय किया कि आम लोगों को निवेश की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए कुछ करना होगा। तब डीप पॉकेट्स पर काम शुरू किया।

ये बताएगा एप
- निवेशकों में बड़ी तादाद फिक्स्ड डिपॉजिट और रैकरिंग डिपॉजिट करने वालों की है।
- डीप पॉकेट्स कंपरेटिव रेट्स के साथ एफडी और आरडी इन्वेस्टमेंट के तरीके बताएगा।
- साथ ही म्युचुअल फंड और इक्विटी इन्वेस्टमेंट की पूरी रिसर्च-एनालिसिस के साथ फायदे-नुकसान बताएगा।

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