बच्चों ने पूरा किया किया चाय-नाश्ता बेचने वाली एक अनपढ़ मां का सपना

यूं तो हर सफल व्यक्ति के पीछे मां का हाथ होता है, किंतु कई परेशानियों से दो-चार हो रही मां के बच्चों की सफलता खास होती है। आज हम बात कर रहे है समस्तीपुर जिला अंतर्गत दलसिंहसराय थाना के पास चाय और नाश्ता बेचनेवाली मीणा देवी उर्फ महादेव कि जिन्होंने चार बेटे व तीन बेटियों का लालन-पालन कर अपना सपना पूरा किया। चार बेटे व तीन बेटियों का लालन-पालन आसान न था।

पति रामजी साह (होमगार्ड) ने जब दूसरी शादी कर ली तो जैसे मीणा पर वज्रपात हो गया। वर्ष 2000 में दलसिंहसराय थाना पोखर के किनारे चाय की दुकान खोल ली। यहां चाय पीने आनेवाले पुलिस अधिकारियों को देखकर मीणा के मन में अपने बच्चों को पढ़ाने की तमन्ना जागी।

उन्होंने कहा कि यह मेरे लिए सपने जैसा था, किंतु मैंने संकल्प ले लिया कि बच्चों को पढ़ाना है। केवल चाय बेचकर बच्चों को पढ़ाना संभव नहीं था। ऐसे में नाश्ता भी बेचना शुरू कर दिया। अहले सुबह से देर रात तक कठोर श्रम के बूते बच्चों की पढ़ाई होने लगी।

बड़े बेटे ने पढ़ाई खत्म कर राजमिस्त्री का काम शुरू कर दिया। मां के साथ वह भी अपने भाई-बहनों की पढ़ाई में आर्थिक मदद करने लगा। दूसरा बेटा शशि कुमार भारतीय रेल के कोलकाता जोन में बतौर पेंट्रीकार प्रबंधक अपनी सेवाएं दे रहा है।

तीसरा बेटा रवि कुमार ने हाजीपुर से होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी की और हैदराबाद में एक वर्ष का विशेष प्रशिक्षण हासिल किया। फिलहाल वह तिरुपति के एक होटल में अपनी सेवा दे रहे है। चौथा बेटा अभी पढ़ाई कर रहा है। दो बेटियों को भी उन्होंने उच्च शिक्षा दिलाने के बाद शादी की। तीसरी पढ़ाई कर रही है।

पेंट्रीकार प्रबंधक शशि कुमार ने कहा कि मैं आज जो भी हूं, मां की वजह से हूं। मां के सपनों को पूरा करने में चाय दुकान की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। हमलोग भी मां को खुशी देने की पूरी कोशिश करते हैं।

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